शनिवार देर शाम बाघ के हमले में मारे गए परमजीत सिंह उर्फ बब्बू के शव को लेकर गुस्साए ग्रामीण रविवार को डीएफओ आवास पहुंच गए। यहां शव को आवास के सामने रखकर वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए डीएफओ के खिलाफ नारेबाजी की।
ग्रामीणों ने राजनीतिक दलों के सदस्यों को भी खरीखोटी सुनाते हुए राजनीतिक रोटियां न सेंकने की हिदायत दी। वन विभाग ने वार्ता कर ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को चार लाख रुपए का मुआवजा, एक परिजन को विभाग में संविदा पर नौकरी देने और आदमखोर तेंदुए को मारा जाएगा। हालांकि विभाग के सामने यह स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है कि परमजीत पर हमला बाघ ने किया था या तेंदुए ने। इधर, करीब दो घंटे तक चले इस घटनाक्रम को लेकर और मौके की नजाकत देखते हुए पुलिस, वन कर्मी, एसडीएम परितोष वर्मा और सीओ स्वतंत्र कुमार भी मौजूद रहे।
शनिवार देर शाम ग्राम गोरखपुर बैड़ाझाल निवासी परमजीत सिंह उर्फ बब्बू (35) पर बाघ ने हमलाकर मार डाला था। गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूरी रात का शव घर से उठने नहीं दिया। रविवार सुबह ग्रामीण शव लेकर वन परिसर पहुंच गए। यहां ग्रामीणों ने शव को डीएफओ कहकशां नसीम के आवास के सामने रखकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की खबर मिलते ही प्रशासन ने पूर्व में वन परिसर में पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा के बंदोबस्त पुख्ता कर दिए थे। साथ ही वनकर्मियों को भी सुरक्षा के लिहाज से तैनात कर दिया गया। ग्रामीणों का प्रदर्शन शुरू होते ही मौके पर राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि भी पहुंच गए। लेकिन, राजनीतिक दलों को हिदायत देते हुए मामले से दूर ही रहने को कहा।
ग्रामीणों ने डीएफओ कहकशां नसीम के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए उनके द्वारा की गई कार्यवाही से गांव वालों को अवगत कराने की मांग की। कुछ देर बाद पुलिस बल के साथ डीएफओ कहकशां नसीम ग्रामीणों के बीच पहुंचीं। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार को चार लाख का मुआवजा दिया जाएगा। इसमें से तीन लाख सरकार की ओर से व एक लाख विभाग की ओर से दिया जाएगा। मृतक के एक परिजन को संविदा पर नौकरी पर रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि विभाग के उच्चाधिकारियों ने आदमखोर तेंदुए को मारने के आदेश भी जारी कर दिए हैं। मृतक के परिजनों को एक लाख रुपए नगद भी दिए गए। डीएफओ के आश्वासन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ। बाद में पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। दोपहर बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया।
शिकारी तैनात, पिंजरा और कैमरे लगाए
रामनगर। तेंदुए और बाघ के हमलों से दो लोगों की जान जाने के बाद गुस्साए ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद वन विभाग अब कुछ हरकत में आया है। गोरखपुर गांव में स्व. मनोज डंगवाल के बगीचे के पीछे नाले के पास एक पिंजरे के साथ एक सीसीटीवी लगाया गया है। एसडीओ कलम सिंह बिष्ट ने बताया कि क्षेत्र में अलग-अलग जगह 10 सीसीटीवी लगा चुके हैं। आदमखोर को मारने के लिए दो शिकारी कोटबाग के ठाकुर दत्त जोशी और पटवाडांगर नैनीताल के हरीश धामी को मौके पर ही रखा है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में स्टाफ और ग्रामीण भी मदद कर रहे है।
बाघ के मिले पैरों के निशान
रामनगर। पिछले दिनों गोरखपुर में ग्रामीण की मौत के बाद रविवार को बाघ और तेंदुए की पहचान के लिए मौके पर पहुंचे शिकारी और विभाग के लोगों को घटनास्थल पर किसी भी जीव के पंजों के निशान नहीं मिले। लेकिन रोड पार डंगवाल के बगीचे में कई जगह बाघ के निशान मिले हैं। एसडीओ कलम सिंह बिष्ट ने बताया कि ये निशान पुराने लगते है।
भाजपाइयों ने फूंका वन विभाग का पुतला
रामनगर। परमजीत की मौत से गुस्साए भाजपा और भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने वन विभाग के खिलाफ कड़ा रोष जताते हुए रानीखेत रोड पर नारेबाजी कर वन विभाग का पुतला फूंका। कार्यकर्ताओं ने कहा कि 13 दिन पहले आदमखोर तेंदुए ने गौजानी निवासी गोविंदी देवी को मार डाला था, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने झूठे आश्वासन देकर ग्रामीणों के आक्रोश को शांत कर दिया। अब विभागीय लापरवाही का खामियाजा परमजीत सिंह को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। उन्होंने मामले से संबधित अधिकारियों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। इस दौरान भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दिनेश मेहरा, जगमोहन बिष्ट, भूपेंद्र खाती, नरेंद्र शर्मा, इंदर रावत, बलदेव रावत, ठाकुर, धीरज रावत, संजय गिल, रोहित पटवाल, गणेश मेहता आदि थे।
वन विभाग के अधिकारियों पर दर्ज कराएंगे केस
रामनगर। ईको सेंसिटिव जोन विरोधी संघर्ष समिति ने ग्राम गोरखपुर निवासी परमजीत सिंह उर्फ बब्बू की मौत के लिए तराई वन पश्चिमी वन प्रभाग के अधिकारियों तथा मुख्य प्रतिपालक को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ सोमवार को एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया है। समिति की लखनपुर में हुई बैठक में आदमखोर तेंदुए द्वारा परमजीत सिंह की मौत पर दुख जताते हुए वन विभाग के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। समिति के सदस्यों ने बताया कि 12 सितंबर को समिति की ओर से तराई पश्चिमी वन प्रभाग की डीएफओ कहकशां नसीम और उपनिदेशक सीटीआर अमित वर्मा को वन्यजीवों की मूवमेंट देखते हुए पहले ही हमले की आशंका जताते हुए आदमखोर तेंदुए को तत्काल मारने की मांग की थी। कहा कि इससे पूर्व भी आदमखोर तेंदुए ने छह सितंबर को ग्राम गौजानी निवासी गोविंदी देवी को मार डाला था। इसके बाद भी विभाग के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। सदस्यों के मुताबिक परिणामस्वरूप शनिवार को आदमखोर तेंदुए ने परमजीत की जान ले ली। बैठक में संयोजक ललित उप्रेती, महेश जोशी, प्रभात ध्यानी, मुनीष कुमार, तुलसी जोशी, मनमोहन अग्रवाल, ललित रावत आदि थे।