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बिंदुखत्ता पर नफे-नुकसान की राजनीति

Sun, 18 Sep 2016 12:58 AM IST
राजेश नेगी
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लालकुआं - फोटो : अमर उजाला
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बिंदुखत्ता नगर पालिका रोल बैक मामले में कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल द्वारा किए गए पलटवार से सियासी हलचल तेज हो गई है। जन सरोकारों को ताक में रखकर इस मामले में राजनीति के नफा-नुकसान को तलाशा जा रहा है।
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इसको लेकर अब कुछ कांग्रेसियों के साथ-साथ कुछ भाजपाई भी नगर पालिका मामले में पुनर्विचार की बात करने लगे है। उल्लेखनीय है कि नगर पालिका के अस्तित्व मेेें आने के बाद से ही अखिल भारतीय किसान महासभा और भाजपा शुरू से ही कैबिनेट मंत्री दुर्गापाल पर हमलावर रही है।

भाजपा जहां नगर पालिका के विरोध में आठ हजार से अधिक लोगों के हस्ताक्षर कर जनमत नगर पालिका के खिलाफ होने का दावा कर रही थी। वहीं, अभाकिस द्वारा भी कई मर्तबा बडे़ आंदोलन कर नगर पालिका का विरोध दर्ज कराया गया।  
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इतना ही नहीं मामला अदालत की चौखट पर पहुंच गया। चौतरफा हमलों से घिरे काबीना मंत्री दुर्गापाल द्वारा अपने ही कुछ खास लोगों से रायशुमारी कराई गई। बकौल दुर्गापाल जनमत पालिका के विरोध में मिला, लिहाजा उन्होंने ग्रामीणों के शिष्टमंडल के साथ देहरादून जाकर मुख्यमंत्री को जनभावनाओं से अवगत कराते हुए यू-टर्न लिया। 

श्रम मंत्री दुर्गापाल का यह दावा भी विपक्षों पर एक बड़े प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। इसको लेकर अब कुछ लोग इसे अपनी सियासी जमीन के कमजोर होने के रूप में आंक रहे है। बहरहाल, अभाकिस और भाजपा नेता नवीन दुम्का यहां अपने पूर्व के स्टेटमेंट पर कायम है।

वहीं, भाजपाइयों का एक धड़ा और कांग्रेस से जुडे़ लोग दुर्गापाल पर परोक्ष हमला करते हुए नगर पालिका वापस लेने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे है। कुल मिलाकर यह मामला जन सरोकार से दूर सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक रूप से लाभ और हानि के तराजू पर तोला जा रहा है।

बीते दिनों कांग्रेस समर्थित भूमिहीन संगठन द्वारा बुलाई गई बैठक को भी इसी नजरिये से देख जा रहा है। बहरहाल, कभी हां कभी न के खेल में नगर पालिका का मसला मिशन 2017 के तहत बेहद हॉट मैटर बनता जा रहा है। किसकी होगी जीत, किसकी गिरेगी साख यह भी चुनाव में देखने वाली अहम बात होगी।
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