हल्द्वानी। कम स्टाफ के बावजूद कोरोनाकाल में स्वास्थ्य महकमे ने जिले में बेहतर काम किया लेकिन शासन की ओर से अब तक खाली पदों पर नियुक्तियां नहीं हो सकी। बेस और महिला अस्पताल में तो डॉक्टरों के पद खाली हैं। इनके अलावा अधिकतर सीएचसी और पीएचसी में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद लंबे समय से रिक्त हैं और किसी तरह व्यवस्था चलाई जा रही है। सूबे की नई सरकार से उम्मीद जगी है कि वह स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में पिछड़ रहे पर्वतीय जिलों को विशेषज्ञ डॉक्टरों का तोहफा देंगे।
पीपीपी मोड में चल रहे रामनगर के अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो 315 पदों के सापेक्ष जिले में 253 पदों पर डॉक्टर हैं 62 अभी भी रिक्त चल रहे हैं। इनमें सीएचसी और पीएचसी में एमबीबीएस डॉक्टर तो तैनात हैं लेकिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं। यानी बच्चों के डॉक्टर, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और फिजिशियन तैनात न होने से दूर अंचलों के मरीजों को जिला मुख्यालय आना पड़ता है। इनके अलावा बेस अस्पताल हल्द्वानी, महिला अस्पताल और बीडी पांडे अस्पताल में भी पदों के सापेक्ष स्टाफ की कमी है।
जिले में सीएचसी
भीमताल, बेतालघाट, कोटाबाग, भवाली, गरमपानी, मालधनचौड़, पदमपुरी, कालाढूंगी, सुयालबाड़ी, रामगढ़।
जिले में टाइप बी पीएचसी
बिंदुखत्ता, लालकुआं, मोटाहल्दू, ओखलकांडा और बैलपड़ाव शामिल हैं, जबकि ओपीडी सुविधायुक्त टाइप ए पीएचसी की संख्या 40 हैं।
बेस अस्पताल को संभाल रहे फिजिशियन
दो सौ बेड के बेस अस्पताल भी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। पर्वतीय जिलों से आने वाले मरीजों को यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों समेत स्टाफ की कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां चर्मरोग, मनोचिकित्सक, फोरेंसिक, लैब सहायक के पद रिक्त चल रहे हैं। लैब सहायक का काम आउट सोर्स कर्मचारी से चलाया जा रहा है।
महिला अस्पताल में महिला विशेषज्ञों की कमी
महिला अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के पद काफी समय से खाली हैं, जो कार्यरत हैं उनमें भी एक संविदा पर काम कर रहीं हैं। इसके अलावा निश्चेतक के दो पद और महिला चिकित्साधिकारी के तीन पद, नर्सिंग अधिकारी के 11 पद खाली चल रहे हैं। वार्ड ब्वॉय और आया के पद सृजित नहीं हैं। आउटसोर्स से रखे कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के जो पद रिक्त हैं उनके लिए भर्ती के प्रयास किए जा रहे हैं। कोशिश है कि रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती हो सके ताकि बेहतर स्वास्थ्य सुविधा लोगों को मिल सके। - डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमओ नैनीताल।