हल्द्वानी/लालकुआं। हल्द्वानी-लालकुआं रेल लाइन पर मोटाहल्दू के पास वन दरोगा बालकृष्ण राम की शताब्दी एक्सप्रेस की चपेट में आने से मौत हो गई। वह तराई पूर्वी वन प्रभाग के गौला रेंज में तैनात थे। ट्रेन चालक का कहना है कि उसने ट्रेन के पास आने पर वन दरोगा को पटरी पर लेटते देखा था। आरपीएफ और पुलिस घटना की जांच कर रही है। पता चला है कि वन दरोगा एक दिन पहले मोबाइल घर पर छोड़कर ड्यूटी के लिए निकले थे। वन विभाग के कर्मचारी भी इस बारे सटीक जानकारी नहीं दे रहे हैं।
पिथौरागढ़ जिले के बेड़ीनाग दौला गांव के मूल निवासी बाल कृष्ण राम (55) तराई पूर्वी गौला रेंज में वन दरोगा के पद पर तैनात थे। उनका परिवार फारेस्ट कंपाउड जेल रोड पर रहता है। बाल कृष्ण के बड़े बेटे नीरज ने बताया कि वह मंगलवार को घर में मोबाइल चार्ज पर लगाकर ड्यूटी के लिए चले गए थे। परिजनों से उनकी 24 घंटे तक बातचीत नहीं र्हुई।
बुधवार दोपहर में परिजनों को सूचना मिली कि करीब साढे ग्यारह बजे वह शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन से कट गए हैं। आरपीएफ और लालकुआं पुलिस की टीम ने मौका मुआयना किया। गौला रेंज के वन दरोगा वीरेंद्र परिहार व अन्य वन कर्मियों ने परिचय पत्र के आधार पर शिनाख्त की। सीओ गणेश चंद्र त्रिपाठी, कोतवाल योगेश चंद्र उपाध्याय, उप निरीक्षक चंद्र शेखर जोशी, कमित जोशी ने घटनास्थल पर जाकर जानकारी ली।
ट्रेन चालक ने देखा था वन दरोगा को
हल्द्वानी। आरपीएफ के उपनिरीक्षक चंद्रसेन सिंह ने बताया कि एक्सप्रेस ट्रेन के चालक ने वन दरोगा को पटरी के पास टहलते हुए दूर से देख लिया था। चालक के अनुसार ट्रेन समीप आने पर वह पटरी पर लेट गए और अपने मुंह पर कपड़ा डाल लिया था।
बेटा बोला, किसी ने नहीं हुआ था विवाद
हल्द्वानी। वन दरोगा के बेटे नीरज ने बताया कि उसका एक भाई और तीन बहनें हैं। छोटा भाई सूरज पौड़ी में परास्नातक कर रहा है। बड़ी बहन राखी बीएड करने के बाद कोचिंग सेंटर में पढ़ाती है। छोटी बहन रेनू रामनगर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टर है। उससे छोटी बहन रवीना एमएससी कर रही है। नीरज का कहना है कि पिता का परिवार के किसी सदस्य से विवाद नहीं हुआ था। दो दिन से वह बाइक भी नहीं चला रहे थे।
मंगलवार को सहकर्मी को मिले थे वन दरोगा
हल्द्वानी। वन दरोगा बालकृष्ण राम मंगलवार से कार्यालय नहीं गए थे। वह मंगलवार की सुबह करीब आठ बजे टीम के एक साथी वन आरक्षी दिलीप सिंह मेवाड़ी को कालाढूंगी रोड पर दिखे थे। दरोगा और वन आरक्षी ने चलते-चलते एक दूसरे का हालचाल पूछा। इस दौरान दरोगा ने बताया था कि उनकी तबीयत खराब है। इसके बाद वह आगे बढ़ गए। इधर, रेंजर गौला गणेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि फील्ड का काम होने के कारण वह कार्यालय कम ही आते थे। मंगलवार को भी वह कार्यालय नहीं आए थे। वह अपने घर भी नहीं पहुंचे। इसी बीच सुबह बच्चों ने कार्यालय आकर उनके घर न आने की जानकारी दी। वन कर्मियों को ढूंढने के लिए लगाया गया था।
पत्नी और बेटी की हालत बिगड़ी
हल्द्वानी। वन दरोगा के मौत की जानकारी मिलने पर पत्नी बाल केशरी और बेटी की हालत बिगड़ गई। बड़े बेटे ने रोते हुए कहा कि उसके पिता कभी आत्महत्या नहीं कर सकते हैं।