रामनगर(नैनीताल)। ग्राम देवीपुर मूलिया, रामनगर निवासी ब्रिगेडियर जसबीर सिंह बरार का हृदय गति रुकने से शुक्रवार को निधन हो गया। शनिवार को रामनगर स्थित घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। शमशान घाट पर सैनिकों और पूर्व सैनिकों ने अंतिम सलामी दी।
उत्तराखंड पूर्व सैनिक लीग रामनगर के अध्यक्ष सूबेदार मेजर नवीन चंद्र पोखरियाल ने बताया कि ब्रिगेडियर जसबीर सिंह बरार जन्म दिनांक 15 मार्च 1951 को हुआ था। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने दुश्मन का दिलेरी से मुकाबला कर पाकिस्तान के 4 सैनिकों को मार गिराया था। ब्रिगेडियर जसबीर सिंह बरार की उत्कृष्ट वीरता और अदम्य साहस के लिए उन्हें दो बार राष्ट्रपति द्वारा सेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया था। ब्रिगेडियर जसबीर सिंह बरार एक लेखक भी थे, उनकी लिखी दो किताबें फाइटिंग फोर्थ और रिफ्लेक्शन आफ कुमाऊं राइफल्स काफी चर्चित रही। रामनगर घाट पर रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट के प्रतिनिधि रूपेश बाटला, पुनीत बाटला, कर्नल आफ द कुमाऊं रेजीमेंट लेफ्टीनेंट जनरल आरके कलीता, उत्तम युद्ध सेना पदक, सेना पदक, विशिष्ट सेना पदक के प्रतिनिधि मेजर मुकेश यादव, सेंट्रल कमांडेंट कुमाऊं रेजीमेंट रानीखेत ब्रिगेडियर आईएस साम्याल, सूबेदार हरीश चंद्रा, नायब सूबेदार गंगा सिंह और कुमाऊं रेजीमेंट के 20 जवानों, पूर्व सैनिक कल्याण एवं उत्थान समिति रामनगर अध्यक्ष सूबेदार मेजर कुलवंत सिंह रावत, ब्लाक प्रतिनिधि रामनगर चंद्र मोहन सिंह मनराल आदि ने पुष्पांजलि अर्पित कर ब्रिगेडियर जसबीर सिंह बरार को अंतिम सलामी दी। ब्रिगेडियर जसबीर सिंह बरार के परिवार में पत्नी सबरीना सिंह, पुत्र बिक्रम सिंह बरार और पुत्री निम्मी हैं।