हल्द्वानी। गौला खनन में लगे हजारों डंपरों में स्पीड गवर्नर (गति नियंत्रक) लगाने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। गौला खनन से जुड़े अधिकांश वाहनों की फिटनेस फरवरी में खत्म होगी, ऐसे में अंधाधुंध गति से दौड़ते वाहनों पर स्पीड गवर्नर लग पाएगा? उसके आसार कम है। वहीं, गौला में पर्वों के खत्म होने के बाद खनन में तेजी आने की उम्मीद है।
सड़क हादसों का एक बड़ा कारण ओवरस्पीड भी है। ऐसे में कॉमर्शियल वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की व्यवस्था लागू की गई है। परिवहन अधिकारियों ने वाहनों की फिटनेस (एक साल के लिए होता है) के साथ स्पीड गवर्नर लगाने की शर्त जोड़ दी है। पर यह व्यवस्था गौला खनन के वाहनों में लागू हो पाएगी? उसके आसार बेहद कम है। गौला नदी में करीब 7500 वाहन पंजीकृत हैं, जिसमें से अधिकतर वाहनों की फिटनेस फरवरी-2019 में खत्म हो रही है। ऐसे में शायद ही कोई वाहन स्वामी इससे पहले वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने को पहुंचे।
सभी कॉमर्शियल वाहनों (तिपहिया समेत कुछ वाहनों को छूट है) में अनिवार्य तौर पर स्पीड गवर्नर लगाने का नियम है। इसके लिए कोर्ट का निर्देश भी है। कॉमर्शियल वाहनों की फिटनेस से पूर्व स्पीड गवर्नर लगे होने की व्यवस्था बनाई गई है। रही बात गौला खनन वाहनों की तो विशेष अभियान चलाकर स्पीड गवर्नर लगाया जाएगा।
- संदीप वर्मा, एआरटीओ (प्रशासन)