रामनगर (नैनीताल)। सीबीआई टीम की जांच में तराई पश्चिमी वन प्रभाग पर फोकस रहा। लगातार तीन दिनों तक सीबीआई की टीम ने तराई पश्चिमी वन प्रभाग के वनाधिकारियों से पूछताछ की। इससे वनाधिकारी पसीना-पसीना हुए तो वहीं सीबीआई टीम की मौजूदगी से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों में भी हड़कंप रहा।
सीबीआई की टीम मंगलवार को यहां पहुंची थी। तब से वह वन परिसर के वन विश्राम गृह में बुलाकर वनाधिकारियों से पूछताछ कर रही है। पहले दिन कॉर्बेट के अधिकारियों से तेंदुओं की खाल मिलने के मामले में पूछताछ की गई थी। इसके बाद से सीबीआई ने लगातार तीन दिनों तक तराई पश्चिमी वन प्रभाग के वनाधिकारियों से पूछताछ की। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के 19 मामलों में पूछताछ की गई। इनमें वर्ष 2016 में बन्नाखेड़ा के एक खेत की तारबाड़ में फंसने से तेंदुए की मौत, 2013 में गुलजारपुर जंगल के किनारे कड़के में तेंदुआ फंसने के मामले में बयान दर्ज हुए। हालांकि वनकर्मियों ने रेस्क्यू चला कड़के से सुरक्षित निकाल तेंदुए को रेस्क्यू सेंटर रानीबाग भेज दिया था। बैलपड़ाव रेंज के छोई में जेसीबी से रेस्क्यू के बाद बाघ की मौत सहित अन्य मामलों में तराई पश्चिमी के वनाधिकारियों से पूछताछ हुई। इस कारण विभागीय अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं।