लालकुआं (नैनीताल)। मालगाड़ी से कटकर हाथी की मौत के मामले में वन और रेलवे विभाग खुद को बचाने में जुट गए हैं। रेलवे ने जांच कर लोको पायलट को क्लीन चिट दे दी है जबकि वन विभाग का कहना है कि हाथी कॉरिडोर में कई बार चेताने के बाद भी रेलवे गति सीमा कम नहीं कर रहा है।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टांडा रेंज के अंतर्गत सुभाषनगर के पास शनिवार रात मालगाड़ी की टक्कर से 10 साल के टस्कर हाथी की मौत हो गई थी। सोमवार को मुख्य लोको निरीक्षक यूसी पांडे, सीनियर सेक्शन इंजीनियर कार्य महेश चंद्रा, सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेलपथ भोजीपुरा आरसी सागर, मुख्य यातायात निरीक्षक मोहन राम ने घटनास्थल का जायजा लिया। समिति की रिपोर्ट के मुताबिक संवेदनशील इलाकों में कहीं भी हाथी कॉरिडोर का साइन बोर्ड, संकेतक नहीं लगे हैं। हाथी कॉरिडोर की लिखित सूचना भी नहीं दी गई है। रिपोर्ट में मालगाड़ी के चालक को क्लीन चिट दी गई है। वहीं डीएफओ चंद्रशेखर सनवाल की टीम ने भी घटनास्थल का दौरा किया था। वन अधिकारियों ने जांच कमेटी का कहना है कि शिवालिक एलीफेंट रिजर्व के हाथी कॉरिडोर में ट्रेन की गति नियंत्रण में रखने को लेकर कई बार पत्र लिखे गए हैं। सुप्रीम कोर्ट, सरकार के भी नियम है कि वन्यजीव बहुल क्षेत्र में गति पर नियंत्रण रखा जाए। साथ ही ट्रैक पर विजिबिलिटी के लिए झाड़ियों की सफाई का जिम्मा भी रेलवे का है। बावजूद इसके रेलवे नहीं सुधर रहा है। सूत्रों के मुताबिक जब वन अधिकारियों ने रेल अधिकारियों से हाथी कॉरिडोर में ट्रेन की गति कम करने के लिए कहा तो उन्होंने इंकार कर दिया। कहा कि विभागीय आला अधिकारियों से निर्देश मिलने तक ट्रेनों की गति कम नहीं की जा सकती।
हाथी तो मर गया, अब वन और रेलवे अपने को बचाने में जुटे
वन विभाग ने रेलवे तो रेलवे ने वन विभाग के सर फोड़ा ठीकरा
हाथी कॉरिडोर में ट्रेनों की गति नहीं हो पा रही है कम
वन विभाग ने भी संकेतक लगाने का काम नहीं किया
काशीपुर, पंतनगर, हल्दी, नगला संवेदनशील इलाके हैं। इन इलाकों में ट्रेन की गति कम करने को कई बार पत्र लिखे हैं। अब उच्चस्तरीय अधिकारियों की वार्ता की जाएगी ताकि इन क्षेत्रों में ट्रेनों की गति कम हो।
- डॉ. चंद्रशेखर सनवाल
डीएफओ, तराई केंद्रीय वन प्रभाग हल्द्वानी।