रामनगर (नैनीताल)। वन विभाग के हाथ अब तक हाथी दांतों के सौदागरों तक नहीं पहुंचे। विभागीय अधिकारी सिर्फ तीन मोहरे पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। जबकि हाथी दांत के तस्करों का नेटवर्क कितना बड़ा और मजबूत है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें वनकर्मी तक लिप्त पाए गए हैं।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग की आमपोखरा रेंज में 27 अक्तूबर को हाथी दांत बेचने जा रहे वन गुज्जर मो. कासिम को वन विभाग ने पकड़ा लिया था। सूत्रों के अनुसार उससे पूछताछ में 12-13 लोगों के नाम उजागर हुए थे। लेकिन वन विभाग अब तक सिर्फ हाथी दफनाने में शामिल वन गुज्जर ऐजाज और वनकर्मी हरीश चंद्र को गिरफ्तार कर पाया है।
बृहस्पतिवार को भी वन विभाग ने शिकारियों को पकड़ने के लिए जंगल में कांबिंग की। लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी। इससे वन विभाग की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि मुख्य शिकारी की वन विभाग में अच्छी पैठ है। इस कारण उसे बचाया जा रहा है। इसमें कई सफेदपोश भी शामिल होने का अंदेशा है। हाथी को किसने कहने पर और किसको बेचने के लिए मारा गया...ये प्रश्न बना हुआ है। उधर, एसडीओ कलम सिंह बिष्ट ने बताया कि आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, अब उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। सभी आरोपियों को पकड़ा जाएगा।
वन्यजीव प्रेमियों ने नहीं किया हंगामा
रामनगर (नैनीताल)। हाथी को करंट देकर मारने के मामले में वन्यजीव प्रेमी भी चुप्पी साधे हैं। अगर वन्यजीव प्रेमी कुछ हंगामा करते तो वन विभाग पर दबाव पड़ता। इसका फायदा उठाकर हाथी दांत तस्कर खुलेआम घूम रहा है।