नानकमत्ता/नंधौर वैली। तराई भाबर के जंगलों में खैर की लकड़ी की तस्करी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। तराई पूर्वी वन प्रभाग की रनसाली रेंज में वन टीम ने कैंटर में लदे खैर के 40 गिल्टों के साथ वाहन चालक को पकड़ा है जबकिछह तस्कर भाग निकले। वाहन चालक से पूछताछ के आधार पर गिरोह के सरगना के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
बृहस्पतिवार तड़के रनसाली के रेंजर महेंद्र सिंह रैकुनी को खैर की लकड़ी की तस्करी की सूचना मिली। इस पर उन्होंने पुलिस को खबर दी और नगला बरकीडांडी मार्ग पर नाकेबंदी कर चेकिंग शुरू कर दी। करीब तीन बजे टुकड़ी गांव से एक कैंटर संख्या यूपी 02 सी 4582 आता दिखाई दिया। टीम ने चेकिंग के लिए रोकने की कोशिश की तो चालक ने कर्मियों को कुचलने की नाकाम कोशिश करते हुए वाहन दौड़ा दिया। टीम ने पीछा कर कैंटर को पकड़ लिया। टीम ने कैंटर चालक राजू निवासी टांडा, गोरू थाना बाजपुर को पकड़ लिया। वहीं तब तक गाड़ी में सवार छह तस्कर मौका पाकर भाग निकले। जब टीम ने कैंटर की तलाशी ली तो भूसे व बुरादे के नीचे छिपे हुए खैर के 40 गिल्टे बरामद हुए। पूछताछ में चालक ने बताया कि जसपाल सिंह पुत्र मोहन सिंह निवासी बाजपुर लकड़ी तस्कर गिरोह का सरगना है। टीम ने गिल्टे कब्जे में लेकर कैंटर को सीज कर दिया है। यह तस्करी का पहला मामला है जब वाहन चालक के साथ सरगना के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। रेंजर रैकुनी ने बताया कि गिरोह के तार ढूंढने की कोशिश की जा रही है।
पहली बार तस्करी सरगना के खिलाफ भी कटा केस
एटा, कानपुर, इटावा पहुंचता है खैर
हल्द्वानी। खैर का कत्था बनाने में इस्तेमाल होता है। अब कत्था का बाहर से आयात बंद होने पर खैर की तस्करी बढ़ गई है। यहां के जंगलों से काटा जा रहा खैर कानपुर, इटावा, एटा, नोएडा दिल्ली तक जाता है। जहां पान मसाला बनाने वाली कंपनियां खैर के मनमाने दाम देती है।
पहले भी तस्करी में लिप्त रहा है सरगना
हल्द्वानी। रेंजर महेंद्र सिंह रैकुनी ने बताया कि गिरोह का सरगना जसपाल सिंह बेहद शातिर किस्म का है। पहले भी खैर की तस्करी में उसका नाम सामने आया है, रामनगर समेत दूसरे वन प्रभागों में भी उस पर खैर की तस्करी के केस दर्ज हैं।