नैनीताल। महिला प्राविधिक संस्थान देहरादून को बंद किए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ओएनजीसी के निदेशक को आदेश दिए हैं कि वह 10 सप्ताह के भीतर विवादित लोगों को छोड़कर दोनों पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर सुनिश्चित करें कि संस्थान बंद न होने पाए। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
देहरादून निवासी पूनम ध्यानी और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड तकनीकी शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित फैशन डिजाइनिंग की परीक्षा याचिकाकर्ताओं ने उत्तीर्ण की है। याचिका में कहा गया कि संस्थान में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के विवाद के चलते नए प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो गलत है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि महिला प्राविधिक शिक्षण संस्थान ओएनजीसी की ओर से संचालित किया जाता है। संस्थान में महिलाओं के लिए फैशन डिजाइनिंग आदि पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इस संस्थान को 1994 में एआईसीटीई से मान्यता भी मिली थी लेकिन अब इस संस्थान को कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के विवाद के चलते बंद किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इस संस्थान को बंद न होने देने की मांग की है।