हाईकोर्ट ने पीसीएस प्री परीक्षा के घोषित परिणाम के बाद आगे की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए सरकार को दस दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति आलोक सिंह एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी मनोज चौधरी, अतुल लापड़ और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से 3 फरवरी 2015 को उत्तराखंड कंबाइंड स्टेट सर्विसेज परीक्षा-2012 की प्रारंम्भिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया गया है। याचियों का कहना था कि यह परीक्षा परिणाम हाईकोर्ट की खंडपीठ की ओर से जारी आदेश के विरुद्ध है। खंडपीठ ने पूर्व की जनहित याचिका में आदेश दिया था कि पीसीएस या अन्य परीक्षा में राज्य आंदोलनकारियों को शामिल नहीं किया जाएगा।
याचियों के मुताबिक इस आदेश के बावजूद कमीशन की ओर से प्रारंम्भिक परीक्षा के रिजल्ट में राज्य आंदोलनकारियों को शामिल करते हुए कट ऑफ मॉर्क्स दिए गए हैं और उन्हें भी चयनित किया है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पीसीएस प्री परीक्षा के घोषित परिणाम के बाद होने वाली कार्यवाही पर रोक लगाते हुए सरकार को दस दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।