कॉलेजियम की प्रथा से जजों की नियुक्ति किए जाने संबंधी प्रयास को अवैध घोषित करने, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट नैनीताल द्वारा नैनीताल में न्यायाधीशों की नियुक्ति नेशनल ज्यूडिशियल अपाइंटमेंट ऑफ जजेस कमिशन एक्ट के प्रावधानों के अनुसार किए जाने के मामले में कोर्ट ने इस प्रकरण पर सुनवाई से इंकार करते हुए इसे अन्य बैंच को भेज दिया है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। वकील एमसी पंत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नेशनल ज्यूडिशियल कमीशन एक्ट के प्रावधान, इसमें इस एक्ट को केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना की तिथि से लागू करने का प्रावधान किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि संवैधानिकता को इस आधार पर चुनौती दी है कि संविधान संशोधन संबंधी बिल पर राष्ट्रपति महोदय की अनुशंसा मिलने के बाद साथ ही लागू हो जाता है।
अत: केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना की तिथि से लागू किए जाने संबंधी प्रावधान संविधान विरोधी है उसे निरस्त किया जाए और पूर्व में कॉलेजियम की प्रथा से जजों की नियुक्ति किए जाने संबंधी किसी भी प्रयास को अवैध घोषित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट नैनीताल द्वारा नैनीताल में न्यायाधीशों की नियुक्ति नेशनल ज्यूडिशियल अपाइंटमेंट ऑफ जजेस कमीशन एक्ट के प्रावधानों के अनुसार की जाए। साथ ही, किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया को अवैध घोषित किया जाए।