नैनीताल। ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारी फैलने व क्षेत्र में हुईं दो मौतों की खबरों का असर अब स्थानीय रेस्टोरेंट कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में बीते एक महीने से पर्यटकों और स्थानीय ग्राहकों में खाने-पीने को लेकर डर बढ़ा है। इसका सीधा असर रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के कारोबार पर पड़ रहा है।
बीते एक महीने से ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारी पीलिया का प्रकोप है। बीते माह बीमारी के चलते एक महिला और एक किशोर की मौत हो गई थी। इसके बाद ज्योलीकोट व आसपास के क्षेत्र में जांच के बाद कई लोग पीलिया से पीड़ित निकले। जांच में क्षेत्र में पानी की गंदगी से बीमारी फैलने की बात प्रमाणित हुई। इसका सीधा असर रेस्टोरेंट कारोबार में दिखा। लोगों ने डर से रेस्टोरेंट में खाना कम कर दिया, वहीं खबरें प्रसारित होने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या भी कम हुई है। रेस्टोरेंट संचालकों ने प्रशासन से क्षेत्र के पेयजल स्रोतों की नियमित जांच, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बीमारी की वास्तविक स्थिति के संबंध में स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।
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बीमारी की खबरें सामने आने के बाद कई लोग यहां खाने-पीने से परहेज कर रहे हैं। पहले वीकेंड, छुट्टियों में रेस्टोरेंट में अच्छी भीड़ रहती थी, अब ग्राहकों की संख्या में कमी आई है।
- वीरेंद्र जोशी, रेस्टोरेंट संचालक
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स्थानीय लोगों के साथ ही बाहर से आने वाले ग्राहक भी पानी और भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। बीमारी के चलते कारोबार ठप हुआ है।
-अर्जुन रजवार, रेस्टोरेंट संचालक
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बीमारी के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है। रेस्टोरेंट में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या पर भी इसका असर पड़ रहा है।
-सुमित जोशी, रेस्टोरेंट कर्मी
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- एक माह से दुकान बंद है, दोनों पुत्रियों और पत्नी के उपचार के लिए लंबे समय तक अस्पताल में ही रहे, इलाज में जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा लग चुका है, कारोबार अब भी ठप है।
- नीरज जोशी नंदू, रेस्टोरेंट संचालक
आयुष्मान कार्ड की जरूरत नहीं, गंभीर मरीजों को सुशीला तिवारी अस्पताल किया जाएगा रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
नैनीताल। स्वास्थ्य विभाग ने ज्योलीकोट में प्रभावित लोगों के उपचार को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में ज्योलीकोट प्रभावित मरीजों को निशुल्क उपचार मिलेगा। आयुष्मान कार्ड नहीं होने पर भी किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर मरीजों को ज्योलीकोट से सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया जाएगा। सीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने यह जानकारी दी है।
सीएमओ ने बताया कि ज्योलीकोट और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण, जांच और जनजागरूकता अभियान चला रही हैं। बेलवाखान, गांजा और ज्योलीकोट में लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों में 87 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ और दवाएं दी गईं। 22 लोगों के ब्लड टेस्ट, 69 की काउंसलिंग और 14 लोगों को टेली-कंसल्टेंसी की गई। सचल चिकित्सा वाहन से खुपी में 43 लोगों की जांच की गई। पीएचसी ज्योलीकोट में भी 34 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ, जबकि एक मरीज को भर्ती किया गया। होमस्टे संचालकों से भी पेयजल, भोजन और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त रखने एवं स्वास्थ्य जांच की अपील की है।
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पानी के 11 सैंपल सही मिले
नैनीताल। ज्योलीकोट स्थित नैंसी कॉन्वेंट कॉलेज और पीपीजेएसवी विद्यालय में पीने के पानी के क्लोरीनेशन से संबंधित 11 सैंपल सही पाए गए। वहीं हाइड्रोजन सल्फाइड जांच के लिए दो सैंपल लिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट 24 घंटे बाद मिलने की संभावना है। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. परमजीत सिंह ने विद्यालय में भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों को स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने तथा भोजन बनाने से पहले और बाद में हाथों की साफ-सफाई की सलाह दी।
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हेपेटाइटिस-ए के मामले घटे
नैनीताल। डॉ. परमजीत सिंह ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट में मरीजों को दिए जा रहे उपचार और लैब रिपोर्टों का भी विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि मरीजों को सही दिशा में उपचार दिया जा रहा है और जांच में हेपेटाइटिस-ए के मामले अब काफी कम सामने आ रहे हैं। उन्होंने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि गंभीर या अधिक लक्षण वाले मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया जाए।
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फोटो- 20 एनटीएल 09 पी
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