हल्द्वानी। एक बार फिर यूपीसीएल की लापरवाही उजागर हुई है। ग्रामीण डिविजन की ओर से उपभोक्ताओं को बिजली खर्च से अधिक के बिल थमा दिए गए। पीड़ित उपभोक्ताओं ने बिल सही कराने के लिए निगम अधिकारियों के चक्कर काटे लेकिन सुनवाई नहीं हुई। थक-हारकर उपभोक्ताओं ने विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच के सामने यह मामला उठाया। मंच के सदस्य हिमांशु बहुगुणा, तिलकराज भाटिया और विष्णु प्रसाद डोभाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ताओं के हित में फैसला सुनाया है।
केस-एक
आदर्श काॅलोनी दमुवाढूंगा निवासी मीरा ने बीती 12 नवंबर को शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि वह बिजली बिल का भुगतान नियमानुसार करती आई है। बीते एक साल से बिल यूनिट के बगैर आईडीएफ में दिया जा रहा है। इसे सही कराने के लिए उन्होंने कई बार विभाग के चक्कर काटे तो लंबे समय बाद उसे 16236 रुपये का बिल थमा दिया जो पहले की तुलना में कहीं अधिक है। चेक मीटर का शुल्क जमा करने के बाद भी चेक मीटर नहीं लगाया गया। ऊर्जा निगम पर उसका 12171 रुपये एडवांस निकला।
केस-दो
कुमाऊं काॅलोनी दमुवाढूंगा निवासी रवि नेगी ने बीती 27 अक्तूबर को शिकायत दर्ज कराई कि उसके विद्युत मीटर की डिस्पले खराब थी और रीडिंग साफ नहीं दिख रही थी। इस पर यूपीसीएल की ओर से उसका मीटर बदला गया तो कुछ समय बाद बिल बढ़कर आने लगा। बाद में मामला मंच में पहुंचा तो ऊर्जा निगम ने पुराने मीटर की 1854 यूनिटों को संशोधित किया। इसके बाद रवि को राहत मिली।
दिसंबर में 59 शिकायतों का किया समाधान
विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच में बीते तीन माह में 50 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें बिलिंग वाले मामले अधिक हैं। मंच के लिपिक प्रकाश चंद्र ने बताया कि सितंबर तक की 20 समेत 70 शिकायतों में से 59 का निराकरण कर दिया गया है जबकि 11 शेष हैं।