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बादल गरजते ही उड़ जाती है नींद

Tue, 14 Jul 2015 01:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल।
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नारायण नगर क्षेत्र के दर्जनों परिवार मौत के मुहाने पर खड़े हैं। बादल गरजते ही आंखों से नींद उड़ जाती है। कब बारिश मुसीबत का सबब बन जाए। पांच जुलाई की रात अभी भूली नहीं है। रविवार शाम हुई भारी बारिश से क्षेत्र के लोगों ने भूस्खलन के बाद पानी के साथ बोल्डर और बजरी के रूप में मौत को आते देखा है।
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 भगवान की कृपा रही कि जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सालों से पाई-पाई कर जोड़ी एक-एक चीज मलबे की भेंट चढ़ गए। नारायण नगर के लोग उस दिन को याद कर कभी आंसू बहाते हैं तो कभी श्रमदान से जीवन को पटरी पर लाने की हिम्मत जुटाते हैं।

हालांकि ऊपरी क्षेत्र में संवेदनशील कैमल्स बैक की पहाड़ी यमराज की तरह खड़ी है। नाले बोल्डर और मलबे से पटे हैं। यदि अब ऐसी बारिश हुई तो फिर भगवान ही मालिक है। नगर से छह किमी दूर नारायण नगर क्षेत्र में 100 से अधिक परिवार बसते हैं। इसमें से 24 परिवार संवेदनशील क्षेत्र में रहते हैं।
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पांच जुलाई हो मूसलाधार बारिश से कैमल्स बैक की पहाड़ी में हुए भूस्खलन से बड़ी मात्रा में बोल्डर और मलबा आवासीय क्षेत्र में पहुंच गया था। इसमें सभी कुछ मलबे की भेंट चढ़ गया। राजेश कुमार पुत्र सुरेश के भवन का एक हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

विकास कुमार के भवन की दीवार समेत खेत खलिहान ध्वस्त हुए तो करीब दो दर्जन मुर्गियां भी मलबे की भेंट चढ़ गईं। सचिन कुमार, रीता देवी, सुनील कुमार, चंद्रा देवी,  राजेश कुमार, सुमित कुमार, अशोक, ज्योति, मोहम्मद समेत एक दर्जन लोगों के आवासों में मलबा और पानी भर गया।

 लोगों का कहना है कि पालिका की ओर से खानापूर्ति के लिए दो कर्मचारी भेजे गए हैं, जो कुछ देर निचले हिस्सों की नाली में कार्य कर चले जाते हैं। लोगों ने श्रमदान कर अपने घरों को दुरुस्त किया है और मार्ग को चलने लायक बनाया।

हालात यह हैं कि एक सप्ताह बाद भी बिस्तर गीले हैं। आपबीती सुनाते-सुनाते उनकी आंखें पानी से भर जाती हैं। उनका कहना है कि जब तक ऊपरी क्षेत्र में सुरक्षा इंतजाम नहीं होंगे, मौत सिर पर मंडराती रहेगी।
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