मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मेरा गांव, मेरा धन’ के तहत 373 सरकारी माध्यमिक विद्यालयों को उच्चीकृत और संचालित करने के लिए पीपीपी मोड पर दिए जाने की सूचना से शिक्षकों का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया।
हर मुद्दे पर आंदोलन की धमकी देने वाले शिक्षक संगठन के नेता तो फिलहाल चुप हैं, लेकिन शिक्षक संगठनों की फेसबुक वॉल पर यह मुददा गरमाया हुआ है।
रामनगर के शिक्षक नवेंदु मठपाल कहते हैं कि सरकारी शिक्षा को योजनाबद्घ तरीके से एनजीओ को सौंपने के लिए शिक्षा में पीपीपी लाया जा रहा है।
गंगोलीहाट से कंचन जोशी, राजेंद्र खाती ने भी इससे होने वाले नुकसानों के बारे में बताया। मुनस्यारी से राजीव जोशी ने आंदोलन की बात कही। देहरादून से मनीष बिष्ट का कहना है कि इस मामले में हमारे नेताओं की चुप्पी समझ से परे है।
लोहाघाट से कुंवर पर्थोली लिखते हैं कि इस मामले में क्या किया जाए। पौड़ी से भूपेंद्र रावत इस मुद्दों को लेकर अभिभावकों के बीच जाने की सलाह देते हैं।