फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जमरानी बांध निर्माण का रास्ता साफ

विज्ञापन
जमरानी बांध स्‍थल फाइल फोटो। अमर उजाला
विज्ञापन
हल्द्वानी। भाबर की लाइफ लाइन जमरानी बांध परियोजना पर लगी अंतिम आपत्ति (पर्यावरण क्लियरेंस) का भी निस्तारण होने से अब बांध निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। बांध परियोजना की अंतिम डीपीआर भी मंजूर हो चुकी है। अब बांध निर्माण के लिए धन की मंजूरी का इंतजार है। सिंचाई अधिकारियों का कहना है कि अब बांध निर्माण में कोई रुकावट शेष नहीं है।
विज्ञापन

जमरानी बांध परियोजना की पर्यावरणीय क्लीयरेंस के लिए एक महीने से अधीक्षण अभियंता संजय शुक्ल की अगुवाई में परियोजना की टीम दिल्ली में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों के संपर्क में रही। एसई शुक्ल ने बताया कि बांध परियोजना को मामूली शर्तों के साथ पर्यावरण क्लीयरेंस का पत्र मंगलवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मिल गया है। मंत्रालय ने ‘मक डिस्पोजल प्लान, वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन प्लान, बांध परियोजना से आच्छादित होने वाली नहरों की डिटेल रिपोर्ट, बांध से सिंचित कृषि क्षेत्र का एग्रीकल्चर प्लान, केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत बांध परियोजना की लागत की डीपीआर की कॉपी’ आदि एक सप्ताह में उपलब्ध कराने को कहा है।
बांध के लिए एआईआई बैंक से धन मिलने की संभावना
सिंचाई एसई संजय शुक्ल ने बताया कि बांध परियोजना की आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद अब वित्त की व्यवस्था होनी है। बांध निर्माण के लिए एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक (एआईआई) से धन मिलने की संभावना है।
विज्ञापन

परियोजना विशेषज्ञ संजय शुक्ल की अगुवाई में बनाई थी टीम
जमरानी बांध परियोजना को फारेस्ट क्लीयरेंस और पर्यावरणीय क्लीयरेंस दिलाने के लिए सिंचाई अधिकारियों की टीम दिल्ली में डेला डाले थी। इसके लिए विभाग ने परियोजना के अनुभवी एसई संजय शुक्ल के नेतृत्व में टीम का गठन किया था। एसई शुक्ल पूर्व में भी परियोजना में रहे हैं और मनेरी भाली परियोजना को मंजूरी दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
कोट
बांध परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने के बाद अब किसी तरह की आपत्ति शेष नहीं रह गई है। पिछले 44 वर्षों में बांध परियोजना की मंजूरी के लिए करीब 14 आपत्तियों का निस्तारण कराया गया। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की शर्तों को पूरा कर लिया गया है। 18 अक्तूबर को अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में टीम को फिर दिल्ली भेजा जा रहा है। यह टीम वहां सभी शर्तों के दस्तावेज सौंपेगी। बांध परियोजना को मंजूरी दिलाने में सभी सहयोगियों का विशेष सहयोग रहा है। बांध के लिए वित्तीय व्यवस्था के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है, जल्द वित्तीय व्यवस्था होने की उम्मीद है।
- मोहन चंद्र पांडेय, मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग।
कोट
जमरानी बांध सरकार की प्राथमिकता में है। आज पर्यावरणीय क्लीयरेंस मिलना बांध निर्माण की दिशा में बेहद खुशी का विषय है। वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन प्लान भी तैयार है। इसे भी जल्द पेश किया जाएगा। बांध निर्माण के लिए वित्तीय व्यवस्था की कवायद तेज कर दी गई है। जल्द धनराशि की उपलब्ध हो जाएगा। बांध परियोजना के सभी अधिकारियों को बधाई।
- भूपेंद्र कौर औलख, सिंचाई सचिव।
परियोजना पर अब तक हुई कसरत
- जमरानी बांध परियोजना को 1975 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद 61.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
- सिंचाई विभाग ने 1981 में गौला बैराज का निर्माण किया। बैराज, 440 किमी नहरों, जमरानी कॉलोनी आदि के निर्माण में 25.24 करोड़ रुपये खर्च किए।
- 1989 में 144.84 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी भेजी गई। इस बीच बांध परियोजना की स्वीकृति में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तमाम आपत्तियां लगती रहीं।
- 2015 में परियोजना की लागत 2350 करोड़ रुपये पहुंच गई।
- 20 जुलाई 2018 में 2850 करोड़ रुपये की डीपीआर संशोधित कर 2573.10 करोड़ की डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी गई।
- फिर 2800 करोड़ की नई डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी।
- 21 जनवरी 2019 में 2954.45 करोड़ रुपये की डीपीआर सौंपी।
- चार फरवरी 2019 को 2584.10 करोड़ रुपये की अंतिम डीपीआर पर लगी मंजूरी की मुहर।
- 11 फरवरी 2019 को तकनीकी स्वीकृति भी मिली।
- वन विभाग के 351 हेक्टेयर जमीन मिली। इसके लिए शासन से 89 करोड़ रुपये क्षतिपूरक राशि दी गई।
- 17 निदेशालयों की स्वीकृति पूर्व में ही ली गई।
- 15 अक्तूबर 2019 को पर्यावरणीय क्लीयरेंस मिली।
........
जमरानी बांध की विशेषता
- 9 किमी लंबा, 130 मीटर चौड़ा और 485 मीटर ऊंचा बनेगा बांध
- 368 हेेक्टेयर वन क्षेत्र में फैला है
- 142.3 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा बांध से
- 42.7 एमसीएम पानी शुद्ध पेयजल के लिए मिलेगा
- उत्तरप्रदेश को 61 एमसीएम, 38.6 एमसीएम पानी उत्तराखंड को सिंचाई के लिए मिलेगा
- 129 परिवारों की 688 की आबादी का होना है विस्थापन
.............
61.25 से 2584.10 करोड़ रुपये पहुंची बांध नई डीपीआर
हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना की नई डीपीआर 2584.10 करोड़ रुपये की है। इसी पर केंद्रीय जलायोग की टीम सहमत हुई है और इसी डीपीआर अंतिम मुहर लगी है।
.............
14 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन
हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना से 14 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य भी रखा गया है। बिजली उत्पादन से क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में भी गुणात्मक सुधार होगा।
..............
150302 हेक्टेयर कृषि भूमि की होगी सिंचाई
जमरानी बांध बनने पर उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड की कुल 150302 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी। इसमें उत्तराखंड की 34720 हेक्टेयर और उत्तरप्रदेश की 115582 हेक्टेयर भूमि शामिल है।
.......................
1989 में भी मिली थी बांध की मंजूरी
जमरानी खंड के अधीक्षण अभियंता संजय शुक्ल ने बताया कि 1989 में भी जमरानी बांध परियोजना को मंजूरी मिल गई थी। लेकिन तब इस प्रतिबंध के साथ मंजूरी मिली थी कि फारेस्ट और पर्यावरण की आपत्तियों का निस्तारण करा लिया जाए। लेकिन दोनों ही आपत्तियों का निस्तारण नहीं होने से बांध निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया था।
129 परिवारों का होना है विस्थापन
जमरानी बांध परियोजना के स्वीकृत होने पर 129 परिवारों का विस्थापन होना है। सिंचाई विभाग विस्थापितों को भूमि उपलब्ध नहीं करा पाने की स्थिति में मौजूदा बाजार दर पर उन्हें मुआवजा देगा।
विज्ञापन

विस्थापित होने वाले गांव
गांव का नाम कृषि भूमि की जरूरत विस्थापित होने वाले परिवारों की संख्या
तिलवाड़ी 9890 हेक्टेयर 33
मुरकुदिया 20800 हेक्टेयर 56
गंदराद 9100 हेक्टेयर 8
पनियाबोर 4000 हेक्टेयर 8
उदवा 2800 हेक्टेयर 8
पस्तोला 6800 हेक्टेयर 16
कुल 47390 हेक्टेयर 129
इन गांवों की कुल जनसंख्या 688
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें