मल्लीताल स्थित फ्लेट्स परिसर में बनाए गए मुख्य मंच पर विंटर कार्निवाल की पहली शाम कुमाऊंनी संस्कृति से सराबोर रही। इस दौरान कुमाऊंनी गायक ललित मोहन जोशी और खुशी जोशी दिगारी के मंच पर आते ही दर्शक समूह झूम उठा। फिर एक के बाद एक चर्चित कुमाऊंनी गीतों का सिलसिला शुरू हुआ तो पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
शाम साढ़े सात बजे मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने किया। उन्होंने कहा महोत्सव से उत्तराखंड की संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया अपनी संस्कृति को बचाए रखने के लिए आगे आएं। तत्पश्चात कलाकारों के दल ने ‘फूली-फूली रे...’ से रंगारंग कार्यक्रम शुरू किए।
मां नयना लोक संस्कृति कला मंच खटीमा के बैनर तले प्रसिद्ध गायक ललित मोहन जोशी ने अपनी गायकी से की। उन्होंने हे दीपा मिजाज दीपा..., सिलगड़ी को पाला थाला..., टक टकाटक कमला बाटुई लागी रे... नानी-नानी सीमा... और नैनीताल की माधुली हिट मेरो दगड़ा जैसे गीत सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जोशी की टीम में शामिल जीतेंद्र सिंह तुमकयाल ने संगीता मैं फोन करूलों..., पुष्कर मेहरा ने लाली हो पधानी लाली... और बेबी प्रियंका ने ओ साहिबा ओ गीत सुनाकर वाहवाही लूटी।
फिर बारी आई कुमाऊंनी गायिका खुशी जोशी दिगारी की। उन्होंने घास काटुलो ईजू..., म्यैर देवरा मोहना...., रंगिली बिंदीली घाघरि काई और हाई तेरी रूमाला जैसे गीत सुनाकर खूब तालियां बटोरी। कुमाऊंनी गायक गोविंद दिगारी ने पहाड़ छूटी गो...., लाली हासिया...., तिलका तेरी लंबी लटी..., पार भिड़ा कोसे घस्यारी... और हाल क्या है ये पूछो जनाब का जैसे गीत सुनाकर लोगों का मनोरंजन किया।
जबकि गजेंद्र राणा ने जय हो नंदा देवी जय बोला..., बबली तेरो मोबाइल हाय रे तेरी स्माइल.., पुष्पा छोरी...जैसे गीत सुनाकर लोगों को मदमस्त किया। कार्निवाल की इस सांस्कृतिक संध्या में कुमाऊंनी गायक पप्पू कार्की को भी पहुंचना था, लेकिन वह किसी कारणवश नहीं आ सके। संचालन हेमंत बिष्ट, नवीन पांडे और विभू कृष्णा ने किया।