ईको टूरिज्म सेंटर चूनाखान में बृहस्पतिवार को जलवायु परिवर्तन विषय में कार्यशाला हुई। इस दौरान केंद्रीय वैज्ञानिक सलाहकार (जैव विविधता और जलवायु ) प्रो. सीआर बाबू ने जलवायु परिवर्तन के खतरों तथा विश्व स्तर पर इस दिशा में किये जा रहे प्रयास पर चर्चा की। कहा जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम से प्रभावी रूप से निपटने के लिये वनों की तुलना में घास के मैदान ज्यादा प्रभावी हैं।
कई देश और प्रदेेशों में घास के मैदानों को वनों में परिवर्तित करने के प्रयासों को उन्होंने अनुपयोगी बताते हुए बीट प्रजातियों लेनटाना को जलवायु परिवर्तन के लिये हानिकारक बताया। दूसरे सत्र में पवलगढ़ कंजरर्वेशन रिजर्व के चांदनी चौड़ में लैनटाना उनमूलन का भी विधि प्रयोग करके वैज्ञानिक विधि से बताया। जिसमें कम समय में लैनटाना की जड़ काटना दर्शाया गया।
इस मौके पर अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी, मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव डा. धरनजय मोहन, डीएफओ रामनगर वन प्रभाग कहकशां नसीम, डिप्टी डायरेक्टर कार्बेट पार्क डा. साकेत बडोला, एसडीओ नैनीताल यूसी तिवारी, प्रख्यात पक्षी विशेषज्ञ गजाला शहाबुद्दीन, डब्लूडब्लू्एफ के डा. बुरेलिया, कार्बेट फाउंडेशन के हरेंद्र भरतरी, सुमांता घोष और सीटीआर, तराई पश्चिमी वन प्रभाग के फील्ड कर्मी मौजूद थे।