भीमताल बायोटेक्नोलॉजी में कार्यशाला का शुभारंभ करते अतिथि। संवाद न्यूज एजेंसी
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भीमताल (नैनीताल)। कुमाऊं विश्वविद्यालय भीमताल परिसर के बायोटेक्नालॉजी विभाग में बुधवार को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद देहरादून और उत्तराखंड जल संस्थान देहरादून के सहयोग से जल गुणवत्ता एवं जल सुरक्षा पर एक गोष्ठी आयोजित की गई।
मुख्य अतिथि यूकॉस्ट देहरादून के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने जल सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि बढ़ती आबादी के साथ दिन प्रतिदिन जल गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। कहा कि आम जनता तक साफ पानी पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य का अपना स्वंय का जल गुणवत्ता मापने का मानक होना अति आवश्यक है। ताकि हर क्षेत्र अपनी जल गुणवत्ता को निर्धारित कर सके। बायोटेक्नालॉजी विभागाध्यक्ष प्रो बीना पांडे ने कहा कि जल की शुद्धता से मानव शरीर में होने वाली 80 प्रतिशत बीमारियों से बचा जा सकता है। साथ ही साफ पानी मानव के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने प्रतिभागियों से जल गुणवत्ता और जल सुरक्षा पर अधिक रुचि लेने को कहा।
कार्यशाला के समन्वयक और डीएवी कॉलेज के रसायन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि अब तक 10 जल गुणवत्ता प्रयोगशालाओं को एनएबीएल की मान्यता प्राप्त हो चुकी है और शेष प्रयोगशालाओं का भी जल्द एनएबीएल प्रमाणिकरण हो जाएगा।
वहीं डॉ. विकास कंडारी ने फील्ड टेस्टिंग किट के जरिए जल गुणवत्ता के सभी भौतिक-रसायनिक एवं जैविक मानकों का प्रशिक्षण दिया। साथ ही मानक से जुड़ी बारिकियों को समझाया। इस दौरान डॉ. तपन कुमार नैनवाल, डॉ. मयंक पांडे, डॉ. संतोष उपाध्याय, डॉ. रिषेंद्र कुमार, डॉ. प्रवीण ध्यानी, हीरा सिंह किरौला, किशन सिंह नेगी विक्की आदि थे।