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जंगल निकलकर शहर में पहुंचा हिमालयन भालू, मचा कोहराम

Mon, 11 Jul 2016 07:59 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल
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भालू - फोटो : file photo
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सरोवर नगरी में रविवार सुबह जंगल निकलकर एक हिमालयन भालू आ धमका। शहर में आए इस भालू ने शायद रास्ता खोजने की कोशिश में एक गेस्ट हाउस और होटल में तोड़फोड़ की। 
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यहां रह रहे पर्यटक के जरिये यह बात फैली तो लोग दहशत में आ गए। प्रशासन के भी होश फाख्ता हो गए। कुछ देर बाद भालू आबादी वाले क्षेत्र में रास्ता खोजते-खोजते, नैनी झील में डूबते-उतराते जंगल में गायब हो गया, पर वन विभाग की टीम छह घंटे तक मशक्कत करती रही। 

बाउंड्री के पास दिखा भालू
सुबह करीब साढ़े चार बजे हिमालयन भालू प्रशांत होटल की बाउंड्री के पास दिखाई दिया। बताया गया कि यह भालू जू मोटर मार्ग से आर्मी के ब्लाक 35 से होता हुआ आलोक साह के वृंदावन गेस्ट हाउस के अंतिम ब्लाक में पहुंचा था। 
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वहां पर उसने पहले एक कमरे का शीशा तोड़ा उसके बाद वह गेस्ट हाउस की चहारदीवारी में लगी लोहे की रेलिंग को तोड़ते हुए प्रशांत होटल की बाउंड्री में घुस गया। यहां उसने कमरा नंबर चार की खिड़की के शीशे को तोड़ दिया। 

जिससे भालू का पैर जख्मी हो गया और उससे खून बहने लगा। इस दौरान शीशे का एक टुकड़ा कमरे में सोये दिल्ली के पर्यटक पंकज खन्ना के सिर में गिरा। बाद में भालू कमरे के पीछे वाली गैलरी में चला गया। गैलरी में दो शौचालय थे भालू ने इन शौचालयों से बाहर निकलने का प्रयास करते वक्त वहां भी तोड़फोड़ की। 

पंकज खन्ना को स्थिति का अंदाजा हुआ तो उन्होंने तुरंत होटल के नौकर जनक बहादुर को आवाज लगाई। फिर उसने मालिक अतुल साह को जानकारी दी। साह जैसे ही गैलरी में पहुंचे तो उनका सामना भालू से हो गया। 

नैनीताल झील पहुंच कर तैराकी का लुत्फ उठाता रहा भालू 
घबराहट में खुद को बचाने के चक्कर में वह पीछे मुड़े तो उनके पांव और हाथ में भी चोट लग गई। उसके बाद भालू जू रोड से करीब साढ़े पांच बजे सुबह नैनीताल झील पहुंच गया और तैराकी का लुत्फ उठाया। 

भालू के आबादी में पहुंचने की सूचना के तुरंत बाद वन विभाग भी हरकत में आ गया। कहा गया कि भालू जू से भागकर आया है। वन विभाग वालों ने तुरंत गिनती की और कहा कि जू के सभी भालू अपनी जगह ही मौजूद हैं। 

जंगली भालू जितनी देर भी आबादी वाले क्षेत्र में रहा, उसने  किसी मनुष्य को निशाना नहीं बनाया। बाद में डीएफओ डॉ. तेजस्विनी अरविंद पाटिल सहित वन विभाग और अन्य कई अधिकारियों ने भालू को आयरापाटा के जंगलों में करीब 10.30 बजे तक खोजा, लेकिन वह कहीं नजर नहीं आया। 

नैनीताल में कभी खुलेआम घूमते थे भालू
पाटिल ने बताया कि यह जू का भालू नहीं था। यह हिमालयन भालू है। बताया जाता है कि कभी ऐसा भी दौर था कि नैनीताल में ऐसे भालू खुलेआम घूमते थे। 

पर्यावरणविद् अनूप साह के मुताबिक 1940 के दशक में मल्लीताल स्थित आनंद सिंह मामू की मिठाई की दुकान पर भालू अक्सर मिठाई बनाने और परोसने में प्रयुक्त पत्तल चाटने आया करते थे। 

नैनीताल के निकट लड़ियाकांटा व किलबरी के जंगलों में कभी यह बहुतायत से थे। आज भी इन क्षेत्रों में इसे यदाकदा देखा जाता है। 

तराई पूर्वी के डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि लड़ियाकांटा क्षेत्र में मानवीय गतिविधियां घटी हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि इस क्षेत्र में भालुओं की संख्या बढ़ गई हो। डा. धकाते के मुताबिक यह भालू निश्चित रूप से लड़ियाकांटा क्षेत्र से उतरकर आया है।
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