शहर के बीचों बीच सब्जी मंडी में चलते फिरते नशे का कारोबार फल फूल रहा है। कारोबार की किसी को भनक नहीं लगे इसलिए कोडवर्ड ‘बीड दे दयो दाज्यू बीड’ का भी इस्तेमाल किया जाता है जो आमतौर पर तंबाकू से भरी एक बीडी मानी जाती है लेकिन इस कोडवर्ड का इस्तेमाल करने पर स्मैक की पुड़िया मिल जाती है। इस नशे के कारोबार को अंजाम देने वाले और कोई नहीं सब्जी मंडी में दिहाड़ी पर काम करने वाले आस पास के मोहल्लों के युवा ही हैं। जो दिन भर यहां वहां घूम कर स्मैक की बिक्री करते हैं।
200 रुपये में दी जाती है एक बीड
स्मैक की पुड़िया 200 रुपये में युवाओं को बेची जा रही है। एक बीड के सौदे पर कारोबारी को 50-60 रुपये मिलते हैं दिन भर में तीन चार बीड बेच लेने पर उसकी दिन की खुराक मुफ्त हो जाती है।
जो पहले नशा करते थे, अब नशा बेचते हैं
नशे के सौदागर बेहद शातिर हो गए हैं। पुलिस से बचने के लिए अब वे नशा करने वालों को ही मोटे मुनाफे का लालच देकर नशा का कारोबारी बना दिया जाता है। इससे अगर पुलिस के डंडे पड़े और मुकदमे दर्ज हो तो युवा ही फंसें ताकि गैंग के सरगना तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंचे। यही वजह है कि अब स्मैक, चरस के गिने चुने अड्डे नहीं वरन हर मोहल्ले में कारोबारी बन गए हैं।
पुलिस और खुफिया एजेंसी है अनजान
मंगल पड़ाव चौकी से सटी हुई है सब्जी मंडी। वहीं खुफिया एजेंसियां भी शहर की पल पल होने वाली गतिविधियों पर निगाह रखती हैं लेकिन स्मैक के इस गोरखधंधे से पुलिस व एजेंसियां भी अनजान हैं। सूत्रों की माने तो गिरोह के लूले घोड़े (छोटे पियादे) की पुलिस से सांठ गांठ है इसलिए पुलिस की नाक के नीचे स्मैक का कारोबार होता है।