नैनीताल। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) केवल कोड और मशीनों का संकलन नहीं बल्कि मानव सभ्यता के सोचने और कार्य करने के तरीके में एक क्रांतिकारी बदलाव है। आने वाले समय में केवल तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं होगा बल्कि समस्या की गहरी समझ और उसका नैतिक व मानवीय समाधान खोजने की क्षमता कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। भविष्य के जॉब बाजार में वे पेशेवर सबसे अधिक मांग में होंगे जो एआई को एक सहयोगी के रूप में इस्तेमाल करना जानते हैं।
आईटी एक्सपर्ट कमल के पांडेय का मानना है कि हमें तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि उसके सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण करने वाला सजग नागरिक बनना होगा। एआई को लेकर समाज में व्याप्त डर और उम्मीदों के बीच वे एक मध्यम मार्ग सुझाते हैं।
उन्होंने कहा कि एआई न तो पूरी तरह संकट है और न ही हर समस्या का रामबाण इलाज। यह एक शक्तिशाली उपकरण मात्र है जिसका परिणाम पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि मनुष्य अपने विवेक से इसका उपयोग कैसे करता है।
पांडेय ने कहा भविष्य में तकनीकी सफलता का मंत्र सही प्रश्न पूछना और समस्या को सही ढंग से परिभाषित करना होगा। एआई दोहराए जाने वाले काम कर सकता है, लेकिन जटिल निर्णय और नैतिक विवेक के लिए मानवीय हस्तक्षेप अनिवार्य है। आने वाले समय में वही पेशेवर टिकेगा जो डेटा-आधारित सोच रखेगा और तकनीक को सरल भाषा में समाज तक पहुंचाने में सक्षम होगा।
पांडेय ने कहा कि एआई चाहे जितना उन्नत हो जाए इंसान की संवेदना, विवेक और नैतिक निर्णय की भूमिका कभी खत्म नहीं होगी। एआई आउटपुट दे सकता है लेकिन अर्थ और दिशा केवल मनुष्य ही दे सकता है।