एक साल बाद हुई क्षेत्र पंचायत की बैठक में सदस्यों में जबरदस्त हंगामा काटा। विभिन्न विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार समेत बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य विभाग की अनियमितताओं पर सदन में सदस्य विभागीय अफसरों पर हावी रहे। जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग में पैसा लेकर लोगों के काम करने, स्टांप पर बिजली कनेक्शन देने, मरे हुए लोगों तक के स्वास्थ्य बीमा कार्ड बनाने और भोजन माताओं की गलत नियुक्ति के आरोप विभागों पर लगाए। इसके अलावा स्वास्थ्य बीमा कार्ड, बिजली के अवैध कनेक्शन दिए जाने और विभागीय कार्यों में सुविधा शुल्क वसूले जाने का मामला भी जोरशोर से उठाया गया। कई अधिकारियों को विभागीय कार्यों की जानकारी तक नहीं थी। जिस पर एसडीएम को सदन में अधिकारियों की अलग से बैठक बुलाकर उनसे अपडेट लेने तक की सलाह देनी पड़ी। डीएम दीपक रावत ने स्वास्थ्य, शिक्षा के मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
डीएम दीपक रावत की मौजूदगी और ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त की अध्यक्षता में हुई बैठक की शुरुआत 12वीं कक्षा में राज्य की टॉपर प्रियंका भट्ट और गौरव पांडे का सम्मान करने के साथ हुई। इसके बाद बीडीसी और ग्राम प्रधानों को प्रस्ताव देने के लिए कहा गया। लेकिन, सभी ने पिछली बैठक की कार्रवाई वाचन और पुष्टि की मांग उठा दी। लोनिवि के ईई सीएस पांडे के माइक पकड़ते ही गौलापार टनकपुर रोड, देवलचौड़ और कालाढूंगी रोड में अतिक्रमण की समस्या उठी। मानपुर पश्चिम की प्रधान भागीरथी बिष्ट ने वन विभाग के 90 फीसदी कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अधिकारी पैसा देने वालों का ही काम करते हैं। इसके अलावा उन्होंने देवलचौड़ में भोजन माताओं की गलत तरीके से की गई नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया।
ग्राम प्रधान बीडी खोलिया, सुरेंद्र बिष्ट, बीडीसी मेंबर अर्जुन सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों ने विभाग पर मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के फर्जी कार्ड बनाने के आरोप मढ़े। उनका कहना था कि विभाग ने मरे हुए लोगों तक के बीमा कार्ड बना दिए गए हैं और जीवित लोगों के कार्ड पर पैसा उपलब्ध नहीं हो रहा है। विभागीय अधिकारियों ने 2011 की गणना के हिसाब से कार्ड बनाये जाने की बात कही। कई सवालों का जवाब अधिकारी नहीं दे पाये। जिस पर एसडीएम पंकज उपाध्याय को कहना पड़ा कि अस्पतालोें को ही योजना की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने डीएम से विभागीय अधिकारियों की बैठक की मांग रखी। बागजाला के बीडीसी मेंबर जगदीश नौला ने कहा कि विद्युत विभाग कुछ क्षेत्रों में महज स्टांप पेपर पर बिजली के कनेक्शन दे रहा है।
प्रधान सुमन लटवाल ने बताया कि विभाग ने उनके क्षेत्र में लगाए पोलों की डिटेल उन्हें नहीं दी। नाबार्ड के तहत नहर कवरिंग का काम हुआ, लेकिन अब सड़कों के पुनर्निर्माण में दिक्कत आ रही है। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने मामला संज्ञान में नहीं होने और जांच करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। डीएम ने आरटीई और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना पर गंभीरता से काम करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। खस्ताहाल स्कूलों की मरम्मत के लिए पैसा उपलब्ध करवाने का आश्वासन भी उन्होंने दिया। बैठक में सीडीओ ललित मोहन रयाल, बीडीओ डॉ. निर्मला जोशी, जिला पंचायत सदस्य प्रकाश गजरौला, लाखन निगल्टिया, शांति भट्ट, कनिष्क प्रमुख जया कर्नाटक, ज्येष्ठ प्रमुख तारा नेगी सहित जनप्रतिनिधि व विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
94 प्रतिनिधि मौजूद, 47 प्रस्ताव पारित
हल्द्वानी। क्षेत्र पंचायत की बैठक में 40 क्षेत्र पंचायत सदस्यों में से 32 और 84 ग्राम प्रधानों में से 62 मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए 44 और ब्लाक प्रमुख द्वारा दिए गए तीन प्रस्ताव बैठक में पारित हुए। मौजूद प्रतिनिधियों में 10 प्रतिशत ने ही समस्याएं रखी, बाकी हाजिरी लगाकर सदन से चले गये। बैठक में लोनिवि के नौ, वन विभाग के छह, स्वास्थ्य विभाग के तीन, विद्युत विभाग के चार, सिंचाई और शिक्षा विभाग के सात, बाल विकास के दो, लघु सिंचाई, समाज कल्याण का एक और जल संस्थान के चार प्रस्ताव पारित हुए। ब्लॉक प्रमुख द्वारा दिए गए तीन प्रस्ताव भी ध्वनिमत से पारित किए गए।
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प्रधानपतियों ने उठाए सवाल
हल्द्वानी। बीडीसी की बैठक शुरू होते ही प्रधानपतियों और प्रतिनिधियों ने सवाल दागने शुरू कर दिए। बीडीओ डॉ. निर्मला जोशी द्वारा कुछ लोगों की पहचान करने पर उन्हें बाहर जाने को कहा गया। बात न मानने पर एसडीएम पंकज उपाध्याय को कहना पड़ा कि अपनी इज्जत अपने हाथ होती है। इसको ध्यान में रखते हुए सदन के सदस्यों को छोड़कर बांकी लोग बाहर चले जाएं। कुछ लोगों द्वारा खुद को प्रधान का प्रतिनिधि बताने पर एसडीएम बोले कि प्रधान की ही उपस्थिति मानी जाएगी। जो प्रधान बैठक में उपस्थित नहीं हो सकता, वह प्रधान पद का क्या प्रतिनिधित्व करेगा। उसके बाद कई लोग सदन से बाहर चले गए।