राजपुरा में खस्ताहाल सड़कों पर उड़ती धूल क्षेत्रवासियों के लिए समस्या बनी हुई है। संवाद
शहर में लंबे समय से खोदी और उबड़-खाबड़ पड़ी सड़कों ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। धूल के गुबार और गड्ढों से भरे रास्तों का असर अब सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। अस्पतालों में कमर दर्द, डिस्क स्लिप, मोच, फ्रैक्चर और सांस संबंधी संक्रमण के मरीज तेजी से बढ़े हैं।
सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन करीब 450 से 500 मरीज सड़क से जुड़ी परेशानियों के कारण उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। खराब सड़कों पर झटकों से रीढ़ और मांसपेशियों की चोट बढ़ रही है, जबकि उड़ती धूल से एलर्जी, गले का संक्रमण और सांस लेने में दिक्कत के मामले सामने आ रहे हैं।
एसटीएच में बढ़े कमर दर्द और एलर्जी के मरीज
सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में ऑर्थो ओपीडी प्रतिदिन 144 से बढ़कर 160 मरीजों तक पहुंच गई है। चिकित्सकों के अनुसार इनमें सबसे अधिक 48 से 55 मरीज कमर दर्द से पीड़ित हैं। डॉ. गणेश ने बताया कि रोजाना कमर में चोट के करीब 20, मांसपेशियों में खिंचाव और लिगामेंट इंजरी के करीब 25 मामले सामने आ रहे हैं। पिछले एक महीने में कमर फ्रैक्चर के 12 मरीज भर्ती किए जा चुके हैं। ईएनटी ओपीडी भी 200 मरीजों तक पहुंच रही है। डॉ. शिवानी के मुताबिक धूल के कारण रोज करीब 100 मरीज बंद नाक, गले के संक्रमण, खराश और जुकाम की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। संक्रमण बढ़ने पर सांस लेने में दिक्कत हो रही है और कई मरीजों का इलाज तीन महीने तक चल रहा है।
बेस अस्पताल में डिस्क स्लिप और मोच के मामले बढ़े
बेस अस्पताल में ऑर्थो ओपीडी 165 से 175 मरीजों तक पहुंच गई है। विशेषज्ञ डॉ. पीसी पंत ने बताया कि रोजाना 55 से 60 मरीज कमर दर्द के आ रहे हैं, जबकि 50 मरीज घुटनों और 20 से 25 मरीज कंधे के दर्द से परेशान हैं। इसके अलावा झटके लगने से दर्द के 40 से 45 मामले, रीढ़ की हड्डी में चोट और डिस्क स्लिप के करीब 20 केस, मोच के 15 से 20 और लिगामेंट इंजरी के 30 मरीज रोज पहुंच रहे हैं। वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिलीप वार्ष्णेय के अनुसार रोजाना लगभग 100 मरीज धूल से होने वाली एलर्जी, छींक, बंद नाक और आंखों से पानी आने की शिकायत लेकर इलाज के लिए आ रहे हैं।