मानवाधिकार हनन को उजागर करने में स्वयंसेवी संगठनों एवं सूचनाधिकार कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, आयोग का प्रयास है कि जनता में मानवाधिकार के प्रति जागरूकता बढ़े, जिससे किसी के भी मानवाधिकारों का हनन न हो सके। यह विचार राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विजेंद्र जैन ने प्रकट किए।
नगर पालिका सभागार में श्री जैन ने मानवाधिकार से जुड़े वादों की सुनवाई के बाद पत्रकारों से वार्ता की। बताया कि आयोग ने दो साल में 2264 में से 1980 शिकायतों का निराकरण कर दिया। आयोग का प्रयास है कि वादी को उसके घर के पास ही न्याय उपलब्ध कराया जाए, इसलिए वह प्रत्येक जनपद में जाकर वादो का निपटारा कर रहे हैं। आयोग द्वारा जनता को पर्चे, पोस्टर, सेमिनार आदि के माध्यम से मानवाधिकार की पूरी जानकारी दिये जाने का प्रयास किया जा रहा है जिससे मानवाधिकार हनन के मामलों को शून्य पर लाया जा सके।
सोमवार को वाद सुनवाई के दौरान 29 मामले सामने आए, जिनमें 6 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। इस मौके पर आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति राजेश टंडन, हेमलता ढौंडियाल, पुलिस महानिरीक्षक डीजे घिल्डियाल, निबंधक एसके गुप्ता आदि मौजूद रहे।