सरकार पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने का दावा कर रही है मगर डॉक्टर इस मंशा पर पलीता लगा रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में बड़ी उम्मीद से जाते हैं लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें निराश होना पड़ता है।
नैनीताल, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों में डॉक्टरों का टोटा चल रहा है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इन इलाकों में भेजे गए कई डॉक्टरों ने ज्वाइन किया ही नहीं। किसी ने ज्वाइन किया भी तो वह दूसरे दिन ही खिसक गया। अब वे कहां हैं इसका भी पता भी नहीं। स्वास्थ्य महकमा अब ऐसे डॉक्टरों को नोटिस देने की बात कह रहा है।
मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूरा करने वाले डॉक्टरों को पहाड़ों पर तैनाती दी जाती है। दुर्गम में तैनाती मिलते ही डॉक्टरों की परेशानी बढ़ जाती है। प्रदेश सरकार का स्वास्थ्य विभाग दावा करता है कि नए डॉक्टर राज्य को मिले हैं और अपनी पीठ खुद थपथपाता है मगर हकीकत इससे इतर है।
नैनीताल जिले को 41 डॉक्टर दिए गए थे मगर पहुंचे सिर्फ 25। पिथौरागढ़ में 31 के सापेक्ष 24 ने ही ज्वाइन किया। अल्मोड़ा में 10 डॉक्टरों ने जाना उचित नहीं समझा। बागेश्वर और चंपावत में स्थिति थोड़ी सुधरी है। बागेश्वर में भेजे गए 37 डॉक्टरों और चंपावत में 25 डॉक्टरों ने ज्वाइन कर नजीर पेश कर दी।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब एक्शन लिया जाएगा। नदारद होने वाले या नहीं पहुंचने वाले डॉक्टरों को विभाग तीन बार नोटिस जारी करता है। नोटिस का जवाब न मिलने पर मेडिकल कॉलेज को बांड की शर्तों के अनुसार ऐसे डॉक्टरों से रिकवरी करने को कहा जाता है।
ये है तस्वीर
जिला डॉक्टर भेजे पहुंचे
नैनीताल 41 25
पिथौरागढ़ 31 24
अल्मोड़ा 38 28
बागेश्वर 37 37
चंपावत 25 25
यह गंभीर मामला है। दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं न देना लापरवाही है। नदारद या ज्वाइन न करने वाले डॉक्टरों की सूचना उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
डॉ. एलएम उप्रेती, सीएमओ