कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल-2016 मीठी यादें छोड़ गया। सिने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी।
बृहस्पतिवार को शत्रुघ्न सिन्हा पर आधारित भारती एस प्रधान की किताब ‘एनीथिंग बट खामोश’ पर चर्चा की गई। शत्रुघ्न ने कहा इस किताब से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। पटना (बिहार) के रहने वाले एक शख्स ने संघर्ष के बूते बॉलीवुड और राजनीति में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में उन्होंने कालीचरण का डायलॉग भी सुनाया।
बताया कि उन्हें शॉर्ट गन नाम शोभा डे ने दिया। खामोश पर चर्चा करते हुए कहा कि वह घर में आपस में बात करते हुए खामोश कहते थे। इस शब्द की खूबसूरती ऐसी थी कि यह धीरे-धीरे प्रसिद्ध हो गया।
फेस्टिवल के तीसरे दिन पूनम सक्सेना, सुदीप सेन, यासर उस्मान, अनूप शाह, उर्मिला पवार, निरुपम दत्त, मेघना पंत, प्रदीप दुबे, अभय कुमार दुबे जैसे जाने-माने चेहरे भी दिखाई दिए।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘सेशन फिफ्टी शेड्स ऑफ़ डिजायर’ से हुई, जिसमें सुदीप सेन, शीनी अन्थोनी वक्ता रहे। संचालन पूनम सक्सेना ने किया। ‘कैसे बचेगा हमारा पहाड़’ सेशन में अनूप शाह, हृदयेश जोशी और राहुल भट्ट ने विचार व्यक्त किए।
संचालन संजय पांडेय ने किया। कार्यक्रम में यासिर उस्मान की किताब ‘रेखा’ पर भी चर्चा हुई। इस दौरान डा. शेर सिंह बिष्ट को कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल-2016 लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। संयोजक सुमंत बत्रा और कमेटी के चेयरमैन दलीप अकोई ने सभी का आभार जताया।
मन की नहीं, दिल की बात तो कर सकता हूं : सिन्हा
एक दिनी प्रवास पर आए शत्रुघ्न सिन्हा ने कुमायूं की वादियों की जमकर सराहना की। उन्होंने अगले महीने फिर कुमाऊं भ्रमण पर आने का वादा किया। कहा कि प्रकृति ने जो सौंदर्य यहां बख्शा है उसके सामने स्विटजरलैंड भी कुछ नहीं।
कहा कि कार्यक्रम में वे मन की बात नहीं तो दिल की बात तो कर ही सकते हैं। ये पूछेे जाने पर कि मन की बात और दिल की बात का क्या मतलब है, तो उन्होंने कहा, हम कलाकार हैं। लोगों को खुश करने के लिए कुछ भी बोल देते हैं।