हल्द्वानी। महिला डिग्री कॉलेज की बीए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा अंजलि बोरा बिच्छू घास के उपयोग से स्वरोजगार की ओर बढ़ रही हैैं। कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में यह बहुतायत मात्रा में होता है। आम बोलचाल में इसे सिसूण (बिच्छु घास) भी कहा जाता है।
अंजलि ने बताया कि सबसे पहले बिच्छु घास को काटकर सूखाती हैं। अच्छे से सूखने के बाद इसके पत्तों को बारीक कर लेती हैं। फिर पैकेजिंग और ऑर्डर मिलने पर ग्राहक तक पहुंचाती हैं। अंजलि बताया कि बिच्छु घास की चाय को स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद माना जाता है। नेटल टी इम्यूनिटी बढ़ाने, सूजन कम करने, रक्त शुद्ध करने, वजन घटाने आदि में फायदेमंद होती है। अब तक अंजलि करीब दस किलो बिच्छु घास की चाय बेच चुकी हैं। लोग यह चाय खूब पसंद कर रहे हैं।