इस बात से सभी वाकिफ है कि प्राइमरी स्कूलों की क्या स्थिति है चाहे वह स्कूल की व्यवस्था से संबंधित है चाहे वह शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित हो। कितने बच्चों पर कितने शिक्षक मानकनुसार नियुक्त किए जाऐंगे।
उत्तराखंड के प्राइमरी स्कूलों की बदहाल स्थिति किसी से छुपी नहीं है। इसी प्रकार के एक प्रकरण में दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों की बदहाल स्थिति को सुधारने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका में सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। शिवांगी गंगवार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड में प्राइमरी स्कूलों की खराब स्थिति के कारण लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं भेज पा रहे हैं।
साथ ही सरकारी अध्यापकों को अन्य कार्य में लगाया जा रहा है। जिससें स्कूलों के बच्चों की पढाई में परेशानी होती है।
याचिका में यह भी कहा था कि स्कूलों में सुविधाओं का अभाव है बच्चों को किसी भी प्रकार की कोई सुविधाएं नहीं मिलती है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।