शहर में पेयजल के अवैध कनेक्शनधारियों की भरमार है, ये पानी तो पीते हैं, लेकिन बिल नहीं देते हैं। एक अनुमान के मुताबिक पिछले दो वर्षों में 10 हजार से अधिक अवैध पेयजल संयोजनों को नियमित करने के बावजूद अब भी शहर में करीब 25 हजार पेयजल कनेक्शन अवैध हैं। जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार गुपचुप तरीके से अवैध कनेक्शन ले लिए जाते हैं, जिनका कहीं खुलासा नहीं हो पाता।
जल संस्थान सूत्रों के मुताबिक शहर की मौजूदा आबादी के हिसाब से पेयजल कनेक्शनों की संख्या काफी कम है। वर्तमान में शहर में 22 हजार और ग्रामीण क्षेत्र में 33 हजार कनेक्शन हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्र की बढ़ती आबादी के हिसाब से पेयजल कनेक्शन अपेक्षाकृत उस अनुपात में नहीं बढ़ रहे हैं, जिस अनुपात में बिजली के कनेक्शनों में वृद्धि हो रही है। शहरी क्षेत्र में जहां एक साल में 10 हजार से अधिक बिजली के उपभोक्ता बढ़े हैं, वहीं पेयजल के मात्र 2500 उपभोक्ता बढ़े हैं, जिससे साफ है कि पेयजल के कई कनेक्शन प्राइवेट प्लंबरों से मिलीभगत कर गुपचुप तरीके से लिए जा रहे हैं।
जल संस्थान के सहायक अभियंता आरपी डोबवाल ने बताया कि अवैध कनेक्शनों के खिलाफ अभियान निरंतर चलाया जाता है। इससे पहले चलाए गए अभियान के तहत 300 पेयजल और 50 सीवर के अवैध कनेक्शन नियमित किए गए हैं। जल्द ही अभियान चलाकर अवैध कनेक्शन नियमित कराए जाएंगे।
बता दें कि चार मई को दमुवाढूंगा के दौरे में आए उपजिलाधिकारी पंकज उपाध्याय को भी अवैध पेयजल कनेक्शनों की जानकारी मिली। उन्होंने अवैध कनेक्शन काटने के निर्देश जल संस्थान के अधिकारियों को दिए हैं।