अब तक हर साल मूर्तियों को विसर्जन के लिए रानीबाग ले जाया जाता है। इसकी वजह से नैनीताल रोड पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है और शहर से लेकर रानीबाग तक जाम लगता है। ऐसे में पर्वतीय जिलों के वाहनों को घंटों परेशानी से जूझना पड़ता है। प्रशासन ने इस विकराल समस्या के समाधान का विकल्प तलाशा है। इसके तहत सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी और नगर आयुक्त परितोष वर्मा ने चिह्नित स्थान का सर्वे भी कर लिया है। इस क्रम में जल्द व्यापार मंडल और धार्मिंक संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई है।
पर्वतीय जिलों के यात्रियों को राहत
नए विसर्जन स्थल से पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें अब रानीबाग में लगने वाले लंबे जाम में तीन से चार घंटे तक फंसना नहीं पड़ेगा। यह कदम यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। इससे शहर के भीतर भी आवागमन सुगम होगा और स्थानीय लोगों को भी सुविधा होगी।
पानी नहीं होगा दूषित, हादसे का खतरा भी टलेगा
पिछले कुछ साल से शहर में शुरू हुई गणेश महोत्सव की परंपरा का अब विस्तार होता जा रहा है। पहले सीमित पंडालों में गणपति महोत्सव मनाया जाता था लेकिन अब यह संख्या बढ़ती जा रही है। महोत्सव में मूर्तियों का विसर्जन रानीबाग की गार्गी नदी में किया जाता है। इससे जहां रानीबाग और इंदिरानगर क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है वहीं नदी का जलस्तर बढ़ा होने के कारण हादसों का भी खतरा रहता है। यहां विसर्जन से गौला बैराज में पहुंचने वाला पानी भी दूषित होता है। ऐसे में नया स्थान बैराज के गेटों के बाद कैंटीन के पास नदी में चिह्नित किया गया है।
गौला बैराज में विसर्जन घाट बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसे लेकर शहर के लोगों के साथ बैठक बुलाई गई है।
एपी बाजपेयी, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी