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भावगत के भी भाव लगा दिए

Mon, 15 Apr 2013 05:30 AM IST
Nainital
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हल्द्वानी। बाजार में सब बिकता है। बस बेचने वाला चाहिए। नये दौर में बिकने वाली चीज की शानदार पैकेजिंग के भी मायने हैं, जो ग्राहकों को लुभाती है। क्या नहीं बिकता इस दुनिया में? खून बिकता है, पानी बिकता है एक जीवन के लिए। पूजा का सामान, पूजा का तरीका बिकता है बेहतर पुनर्जीवन के लिए। जिस तेजी से चीजें बिकती हैं, मांग बढ़ती है उसी अनुपात में कीमतें भी बढ़ती है। यही कारण है कि पिछले दस सालों में भागवत कथा के आयोजन की कीमत 12 गुना बढ़ गई। समाज की नजरों में ढंग से रामायण पाठ, जागरण कराना भी आज आम आदमी के बूते की बात नहीं है। जेब में पैसा नहीं है तो पंडित जी भी आपके बेहतर पुनर्जीवन और पाप काटने के लिए छोटेमोटे धार्मिक अनुष्ठान से अधिक कुछ नहीं कर सकते।
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हाल ही की बात है जब धर्म और पैसे का कोई मेल नहीं था। बस आपका मन होना चाहिए धार्मिक आयोजन का। ये वह दौर था जब सब प्रभु की मर्जी से होता था और जब वह चाहते थे तब ही होता था। अब इस मुगालते में मत रहना। आज सब बाजार की मर्जी है। यदि अब आप भागवत कराना चाहते हैं और जेब में पूंजी नहीं है तो पंडित जी आपको भाव देने वाले नहीं। आज सात दिन तक चलने वाले भागवत की दक्षिणा 60 हजार की बैठती है। इसमें को आपको श्रीमद् भावगत, देवी भागवत और शिवपुराण भी सुनने को मिलेगा। इसके अलावा कीमत घट-बढ़ सकती है आपकी रुचि के अनुसार। यदि आपको बेहतर साउंड चाहिए तो आपको अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ेगा। 60 हजार रुपये में आपको सामान्य साउंड व्यवस्था के साथ भागवत के लिए नौ लोग मिलेंगे। इसमें एक आचार्य, एक यज्ञाचार्य, एक कथावाचक, एक सुबह पूजा करने वाले पंडित, चार संगती और एक व्यक्ति जो इस पंडित मंडली के लिए खाना पकाएगा। हालांकि शहर में मोटी जेब वाले भक्त भागवत पर दस लाख रुपये तक भी खर्च कर रहे हैं। इसके लिए पंडित भी दिल्ली जैसे महानगरों से बुलाए जाते हैं।
रामायण पाठ की कीमत अलग है। 24 घंटे चलने वाले इस धार्मिक आयोजन के लिए आपको 11 हजार रुपये खर्च करने होंगे। इसमें आपको कथा वाचक समेत आठ कलाकार मिलेंगे। रामायण के साथ आप सुंदरकांड भी सुनेंगे। जागरण लगाने की कीमत रामायण से कुछ ज्यादा है। इसके लिए आपको 15 से 35 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। हालांकि इस टीम का दायरा भी बढ़ा होता है। इसमें 12 कलाकार शामिल होते हैं। जागरण दरबार की भी अपनी-अपनी कीमतें तय हैं। मुरादाबाद, बरेली, रुद्रपुर से शहर में जागरण के लिए दरबार आते हैं। ऐसे में कई बार खर्च 35 हजार से ऊपर भी जा सकता है। अब आपके पास इतने पैसे नहीं हैं तो आप अगला जीवन बेहतर करने के लिए केवल छोटेमोटे धार्मिक अनुष्ठान कराइए। इसका शुल्क (दक्षिणा) पंडित जी आपको मौके पर ही आपकी हालत देखकर बताएंगे।
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