नैनीताल। हाईटेक जमाने में तीज-त्योहारों का ट्रेंड भी बदल गया है। पहले भैयादूज पर बहने जहां दूबे, घी और चूड़े से वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भाइयों को टीका कर उनकी दीर्घ आयु की कामना करती थीं, वहीं आज समय के अभाव और बदलती जीवन शैली के चलते चूड़े, घी, दूब भाइयों को कुरियर होने लगे हैं।
मल्लीताल बड़ा बाजार निवासी बसंती पंत (60) कहती हैं कि आज के समय में रीति-रिवाजों में तेजी से बदलाव आने लगा है। उनके अनुसार पहले बहने वैदिक मंत्रांच्चारण के साथ पारंपरिक रूप से भैया दूज पर्व मनाती थीं। आज भाइयों के नाम का अक्षत, पिठिया ,चूड़ा और फल सब कुरियर हो रहे हैं। दूरदराज इलाकों में रह रहे भाई-बहिनों का शगुन कुरियर करते हैं और इसी तरह पत्राचार द्वारा त्योहार मनाने की नयी परंपरा शुरू हो गई है। मल्लीताल स्थित श्याम सुंदर पंसारी दुकान के नरेश गर्ग के अनुसार भाइयों को कुरियर करने के लिए दीपावली से कई दिन पूर्व महिलाओं द्वारा पूजा सामग्री की खरीददारी शुरू हो गई थी। वह कहते हैं कि राखी, भिटौली या फिर भैयादूज का टीका आदि सभी चीजें आज कुरियर हो रही हैं।
परंपरा समिति के व्यवस्थापक बृजमोहन जोशी के अनुसार अक्षत, पिठिया के अतिरिक्त घी, दूब और चूड़े से भाइयों की पूजा की जाती है। चूड़ा पूजन के दौरान आमा, बुर्जुग महिलाएं... पहाड़ी मेेेें ‘लाख हरियाऊ, लाख बग्वाऊ, लाख चैतू’ समेत ‘जी रे, जागी रे, बची रे, यौ दिन-यौ मास नित-नित भेटन रै...’ गाकर भाइयों की दीर्घ आयु की कामना के साथ उन्हें आशीष देती हैं लेकिन आज पूजा की विधि के तौरतरीके बदल गए हैं। दूर क्षेत्रों में रह रहे भाइयों को भैयादूज का टीका कुरियर किया जाने लगा है।