हल्द्वानी। असाध्य रोगों के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की भी अच्छी संख्या है। इन बच्चों की बीमारियों का इलाज राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में निशुल्क हो रहा है, जबकि निजी अस्पतालों में इसके लिए मोटी रकम खर्च होती है।
अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार टेढ़े मेढ़े पैर के 49, अविकसित हृदय के 69, बहरेपन के 17, तालू के चिपकने के नौ मामले हायर सेंटर भेजे गए। इनके अलावा जिन रोगों का उपचार स्थानीय अस्पतालों में किया जा सकता है, उन्हें वहां रेफर किया जाता है। एक साल में जिले की डीईआईसी (डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर) की ओपीडी में 1098 मामले जन्मजात असाध्य रोगों के रजिस्टर्ड हुए हैं। इनमें से 947 मामलों का उपचार डीईआईसी ने स्थानीय स्तर पर किया है, जबकि 151 मामलों को हायर सेंटर भेजा गया। इनमें भी 93 मामलों में सर्जरी की गई। वहीं 58 मामले ओपीडी में मेडिसन ट्रीटमेंट से सही हो गए।
डीईआईसी के माध्यम से ऐसे मरीजों को एम्स, राममूर्ति, ग्राफिक ऐरा आदि अस्पतालों में निशुल्क इलाज के लिए भेजा जा रहा है। -डॉ. केके पांडे, पीएमएस बेस अस्पताल।
इन गंभीर बीमारियों का हो रहा निशुल्क इलाज
तालू का चिपकना, कटे होंठ, बहरापन, अंधापन, टेड़े मेड़े पैर, दिल में छेद, दांतों में गंभीर रोग समेत प्लेट्स की कमी आदि। इनमें सर्जरी की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में हर माह बाहर इलाज हो रहा है। पिछले एक साल में 151 मामले रेफर हुए हैं, जिनमें 93 मरीजों की सर्जरी हुई है।