हल्द्वानी। पांच जून 2003 को जम्मू कश्मीर के पश्चिमी क्षेत्र में सीमा पर शहीद हुए कुमाऊं के लाल जगत सिंह को लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
मंगलवार को जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला के कार्यालय में शहीद जगत सिंह की याद में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। उन्होंने बताया कि बागेश्वर जिले के सीलिंग भैसरवाली लाहोरखेत (कपकोट) में 10 अगस्त 1983 को शहीद जगत सिंह का जन्म हुआ था। रिटायर्ड सैनिक लाल सिंह के चार बच्चों में सबसे बड़े बेटे जगत सिंह ने 20 जून 2001 को इंटर की परीक्षा के बाद हल्द्वानी में आयोजित सेना की भर्ती में शामिल हुए। सेना अधिकारियों ने जगत सिंह को 16 कुमाऊं रेजीमेंट में स्थानांतरित कर दिया।
उन्होंने बताया कि पांच जून 2003 को पाकिस्तानी सेना ने सीमा पर अकारण फायरिंग शुरू कर दी। मोटार्र और तोप के गोलों से भारतीय सैनिकों ने जवाबी फायरिंग की। इस बीच बमबारी में कुमाऊं के लाल जगत सिंह शहीद हो गए।
श्रद्धांजलि देने वालों में शहीद के पिता रिटायर्ड सैनिक लाल सिंह और मां जानकी देवी, एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव, निवर्तमान मेयर डॉ. जोगेंद्र सिंह रौतेला आदि मौजूद थे।
बेटे की शहादत पर हमें हैं गर्व
शहीद जगत सिंह के पिता लाल सिंह भी भारतीय सेना की आर्टिलरी 29 एडी से 1987 में रिटायर्ड हुए थे। उन्होंने शास्त्रीनगर बिंदुखत्ता में अपना मकान बना लिया। जगत की पढ़ाई भी लालकुआं क्षेत्र में ही हुई। पिता ने रुंधे गले से कहा कि बेटे की मौत पर दुख है लेकिन गर्व है कि मेरा लाल मातृभूमि के लिए लड़ते लड़ते शहीद हुआ।