हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय की लापरवाही का हाल यह है कि एमए समाजशास्त्र चतुर्थ सेमेस्टर के एक छात्र को परीक्षा में एक प्रश्नपत्र में नौ अंक दर्शाकर फेल कर दिया गया। छात्र ने जब आरटीआई के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका निकलवाई तो 75 में से 45 अंक अंकित देख वह भौचक्का रह गया। विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बावजूद छात्र को फेल कर दिया गया।
एमबीपीजी कॉलेज के एमए समाजशास्त्र के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र देवेंद्र कुमार ने बताया कि चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा जुलाई में हुई थी। पिछले माह परिणाम आया तो चतुर्थ प्रश्नपत्र में 75 में से सिर्फ नौ अंक दर्शाए गए। अंकतालिका में भी उसे कम अंक आने के आधार पर फेल दर्शाया गया जबकि उसकी प्रश्नपत्र अच्छा हुआ था। छात्र ने बताया कि उसने सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत चतुर्थ प्रश्नपत्र की उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति मांगी थी। कुमाऊं विश्वविद्यालय से सोमवार को उसे उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति मिली तो उसमें अंकित प्रश्नों के अंक कुछ और ही निकले, यानी उत्तर पुस्तिका में सभी प्रश्नों को हल करने पर उसे 75 में से 45 अंक मिले हैं इस आधार पर वह स्पष्ट तौर पर उत्तीर्ण है, इसके बावजूद उसे फेल दर्शा दिया गया। छात्र देवेंद्र ने मंगलवार को एमबीपीजी कालेज में प्राध्यापकों को अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाई। इधर, इस संबंध में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौडियाल और परीक्षा नियंत्रक से बात करने के लिए मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई मगर बात नहीं हो सकी।