हल्द्वानी। गौला में इस साल नगदी का गोलमाल नहीं हो पाएगा। गौला में खनन के लिए जिम्मेदार वन विकास निगम और वन महकमे ने प्रक्रिया को पूरी तरह कैशलेस बनाने की कवायद शुरू कर दी है। अगर कोशिशें परवान चढ़ीं तो गौला के गेटों पर वाहनों की आवाजाही में होने वाला नगद लेनदेन बंद होगा। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर वसूले जाने वाले ‘सुविधा शुल्क’ को खत्म करने में मदद मिलेगी। हरीश रावत सरकार ने ई रवन्ना लागू किया था लेकिन यह पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था।
गौला में शीशमहल से शांतिपुरी तक 12 गेटों से खनन सामग्री की निकासी होती है। इनमें 11 गेटों पर 7450 पंजीकृत वाहनों से खनन किया जाता है, जबकि महज एक गेट से घोड़े बुग्गी से खनन होता है। इन्हीं गेटों से खेल शुरू होता है। दरअसल, गौला से रेता बजरी भरने पर रॉयल्टी, धर्म कांटे तुलाई, रोड टैक्स आदि शुल्क वसूले जाते हैं। इन्हीं की आड़ में 20 रुपये अतिरिक्त वसूले जाते हैं। बताया जाता है कि यह राशि वन निगम और वन विभाग में बराबर बंटती है। दिन भर में हजारों गाड़ियां निकलने पर यह रकम रोजाना करीब 1 लाख 50 तक पहुंच जाती है। ई रवन्ना लागू कर रायल्टी को ऑनलाइन हो गई लेकिन रोड टैक्स अभी भी नगद लिया जाता है। इसी की आड़ में हर रोज लाखों के वारे न्यारे होते हैं।
इस तरह होंगी कैशलेस
गौला गेटों पर ई रवन्ना लागू हुआ तो इस सिस्टम को संचालित करने के लिए इंटरनेट उपकरण मुहैया कराए गए। अब इसी से बैंकों की स्वाइप मशीनें लगाई जाएंगी, जो भी शुल्क होगा वह आनलाइन, डिजीटल ही जमा किया जाएगा। इससे किसी भी किस्म की धांधली पर रोक लगेगी। इस बाबत सरकारी बैंकों से वार्ता चल रही है।
ये समस्याएं बन सकती है कैशलेस में रोड़ा
1. डंपर में चालक, क्लीनर होते हैं जो दूसरे प्रदेशों से होते हैं। आमतौर पर इनके बैंक खाते नहीं होते हैं ऐसे में शुल्क डेबिट कार्ड से छोटे-छोटे भुगतान करना संभव नहीं होगा।
2. स्टोन क्रशर तो एक हफ्ते की एडवांस रायल्टी जमा करा देते हैं लेकिन जो डंपर स्वामी एक-एक दिन के अंतर पर खरीदारी करता है, नगद भुगतान बंद होने पर रायल्टी जमा करने में दिक्कत होगी।
3. इंटरनेट बंद होने पर होने वाला नगद कारोबार भी पूरी तरह ठप हो जाएगा
गौला को कैशलेस बनाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। बैंकों से वार्ता की जा रही है, जल्द ही समाधान होगा। -नीतिश मणि त्रिपाठी, प्रभागीय वनाधिकारी, तराई पूर्वी
वन निगम गौला को पूरी तरह कैशलेस बनाने के लिए तत्पर है। वन, प्रशासन से भी इस बाबत वार्ता हो गई है। - एमपीएस रावत, क्षेत्रीय प्रबंधक, वन विकास निगम