हल्द्वानी। राज्य के राजकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के रिक्त पदों पर ‘कामचलाऊ शिक्षक’ रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले चरण में सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों के महाविद्यालयों में तैनाती होगी, उसके बाद ही मैदानी क्षेत्रों के महाविद्यालयों को ‘कामचलाऊ शिक्षक’ रखने की अनुमति मिलेगी।
शासन ने राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होने पर ‘कामचलाऊ’ व्यवस्था के अंतर्गत अस्थायी 332 शिक्षकों को रखने के आदेश उच्चशिक्षा निदेशालय को दिए थे। इसके साथ ही उच्चशिक्षा निदेशालय को ही संबंधित महाविद्यालयों को ‘कामचलाऊ शिक्षक’ रखने की अनुमति देने के लिए अधिकृत किया गया।
इधर, उच्चशिक्षा निदेशालय ने पहले चरण में पर्वतीय इलाकों के ‘कामचलाऊ शिक्षक’ रखने की अनुमति प्रदान कर दी है। निदेशालय ने महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि यूजीसी नियम- 2016 के तहत नेट एवं पीएचडीधारकों का ही चयन किया जाए, चयन में गड़बड़ी होने पर प्राचार्य जिम्मेदार माने जाएंगे। चयनित कामचलाऊ शिक्षकों को किसी तरह का नियुक्ति पत्र नहीं दिया जाएगा।
उच्चशिक्षा के निदेशक डॉ. बीसी मेलकानी ने कहा कि नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून को छोड़कर अन्य पर्वतीय जिलों के महाविद्यालयों में ‘कामचलाऊ शिक्षक’ रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, इसमें नैनीताल और देहरादून के पर्वतीय महाविद्यालय भी शामिल हैं। इसके उपरांत मैदानी महाविद्यालयों को ‘कामचलाऊ शिक्षक’ रखने की अनुमति दी जाएगी। यह व्यवस्था पर्वतीय महाविद्यालय खाली न रहे, इसके लिए यह फैसला लिया गया है।
- पहले पहाड़ फिर मैदानी क्षेत्र के महाविद्यालयों में होगी तैनाती
- नेट एवं पीएचडीधारकों का ही चयन कर सकेंगे महाविद्यालय