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भा गया युवाओं को पुस्तक मेला

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हल्द्वानी। रामलीला मैदान में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) के पुस्तक मेले में दूसरे दिन युवाओं में खासा क्रेज दिखा। वृद्धजनों, छात्रों महिलाओं, छोटे बच्चों से संबंधित पुस्तकें, शैक्षिक खिलौने, सीडी, स्मार्ट एजूकेशनल सिस्टम तक उपलब्ध हैं। वाटरप्रूफ टेंट के नीचे समाहित पुस्तकों के भंडार में काल मार्क्स, लेनिन, शहीद भगत सिंह, राहुल सांकृत्यायन, ओशो सहित रोग दोष, राशि, ग्रह चाल, खान-पान संबंधी हर पुस्तक मौजूद है।
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प्राण के मुरीद कई, चार हजार कामिक्स बिकी
डायमंड बुक्स के स्टॉल पर कई लोग55 की उम्र में बचपन की यादें ताजे करते दिखे। एक वृद्ध ने चार कॉमिक्स खरीदी और कहा पोते को पढ़ाऊंगा, जब मैं उसकी उम्र था तक बहुत पढ़ता था वो बात अलग है, तब कीमत पांच रुपये होती थी और आज सौ रुपये में एक खरीद रहा हूं। वहीं स्टॉल संचालक वीरेंद्र ने बताया कि पहले दिन चार हजार की कॉमिक्स की बिक्री हुई है।

- चकमक ने बच्चों की तबियत कर दी चकाचक
एकलव्य प्रकाशन के स्टॉल पर बिक रही छोटे उम्र के बच्चों सहित विज्ञान के छात्रों के लिए उपयुक्त पुस्तक चकमक बच्चों को लुभा रही है। स्टॉल संचालक बहादुर सिंह जादव ने बताया कि तीन हजार की ब्रिकी कर चुके हैं। छह हजार रुपये की आजीवन सदस्यता पर 15 सौ रुपये मूल्य की किताबें भी मुफ्त दी जा रहीं हैं।
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- शहीद भगत सिंह और आरक्षण का पक्ष, विपक्ष और तीसरा पक्ष पुस्तकों की सबसे मांग
जनचेतना प्रकाशन समिति की स्टॉल संचालिका कविता कृष्णा पल्लवी ने बताया कि युवाओं ने शहीद भगत सिंह, आरक्षण का पक्ष, विपक्ष और तीसरा पक्ष पुस्तक के प्रति खासी रुचि दिखाई है। तीन हजार रुपये की पुस्तकें बिक चुकी हैं।

- लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बना चुकी सबसे महंगी पुस्तक शब्द वेद: भी पहुंची हल्द्वानी

पत्रिका पब्लिकेशंस के स्टॉल पर बच्चों से लेकर वेद, पुराण, इतिहास की तमाम पुस्तकें उपलब्ध हैं। पूरे पुस्तक मेले की सबसे महंगी पुस्तक और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करवा चुकी पुस्तक शब्द वेद: भी ग्राहकों में कौतूहल का विषय बनी हुई है। चारों वेदों को समाहित करने वाली पुस्तक के बारे में स्टॉल संचालक दिनेश कुमार ने बताया कि पुस्तक की कीमत 6500 रुपये है। इस पुस्तक कासंचयन एवं प्रस्तुति करने वाले कर्पूरचंद्र कुलिश को 11 वर्ष का समय लगा। पुस्तक को रखने के लिए लकड़ी की अटैची भी है। इसमें 4000 पृष्ठ हैं तो वहीं इसका साइज 50 ग़ुणा 40 सेमी का है।


पिटी हुई गोट के जरिये कसा समाज पर तंज
हल्द्वानी। निर्देशक कैलाश कुमार द्वारा लगभग 30 कलाकारों के साथ तैयार किए गए नाटक पिटी हुई गोट के द्वारा समाज में नारी की स्थिति को प्रदर्शित किया गया।
साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका गौरा पंत उर्फ शिवानी की कहानी को नाटक में रूपांतरित किया गया। नैनीताल की पृष्ठभूमि पर आधारित इस नाटक में लोककला के कई बिंदुओं को उजागर किया गया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अभिनय, स्टेज क्राफ्ट, लाइटिंग, मेकअप आदि का प्रशिक्षण भी दिया गया। नाटक ने मानवीय सोच, दशा, मनोव्यथा, बेहतरी की चाह में धोखा, फरेब, चालबाजी को जिस तरह से पिरोया वह तारीफ के काबिल रहा। नाटक की कहानी में युवा नेता महिम भट्ट का दिल बुजुर्ग दुकानदार गुरदास की युवा पत्नी चंदो पर आना और जुए में गुरदास को बरगलाकर उसकी पत्नी चंदो को पाने की लालसा और बदनीयती को उजागर करता है। वहीं जुए में हार और अपमान का शिकार हुए गुरदास का झील में कूदकर जान दे देना आजकल के हालात को दर्शाता है। गुरदास के चरित्र में शहर के प्रतिष्ठित लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता कस्तूरी लाल तागरा के अभिनय की सभी दर्शकों ने प्रशंसा की। चंदो के चरित्र को अपने मार्मिक अभिनय से ईशा श्रीवास्तव ने जीवंत किया। कुटिल नेता महिम भट्ट के किरदार में संदीप सिंह ने भी खूब तालियां बटोरीं। अन्य अभिनेताओं में अली सिद्दीकी, हरीश त्रिपाठी, संदीप रावल, शिवानी, पूजा, रामकुमार आदि ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। दयाल पांडे, पुष्पा टम्टा ने संगीत व्यवस्था की।
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