रानीखेत (अल्मोड़ा)। पूर्व सैनिकों ने अब गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए संघर्ष करने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय सैनिक संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक दलों में इच्छाशक्ति का घोर अभाव है।
राज्य आंदोलन की तर्ज पर वृहद आंदोलन करने की जरूरत है। इस लड़ाई के लिए पूर्व सैनिक भी तैयार हैं। पर्वतीय विकास की अवधारणा को लेकर राज्य का गठन हुआ, लेकिन राजनीतिक दलों ने इस अवधारणा को दरकिनार कर अपनी सहूलियत को तरजीह दी। बजट सत्र से पहले ही गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग को लेकर संस्था ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा है।
राष्ट्रीय सैनिक संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्र की अवधारणा को लेकर पृथक उत्तराखंड राज्य के लिए वृहद आंदोलन हुआ। 2000 में राज्य का गठन तो किया गया, लेकिन तत्कालीन भाजपा की अंतरिम सरकार ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के बजाए देहरादून को अस्थायी राजधानी बना दिया, वहीं तमाम सुविधाएं उपलब्ध कर ली गई। 2002 में कांग्रेस सरकार ने भी पांच साल तक इस मुद्दे पर जमकर राजनीतिक रोटियां सेंकी, लेकिन स्थायी राजधानी का मुद्दा आज तक हल नहीं हुआ है। जिलाध्यक्ष पूर्व सूबेदार हरी सिंह नेगी ने कहा कि गैरसैंण कुमाऊं और गढ़वाल के मध्य में स्थित है। दोनों मंडलों के लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को ज्ञापन भेजकर कहा है कि आगामी बजट सत्र से पहले गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किया जाए, नहीं तो पूर्व सैनिक आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। ज्ञापन भेजने वालों में प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व कर्नल जीजी गोस्वामी सहित तमाम पूर्व सैनिकों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।