हल्द्वानी। सेवानिवृत्त होने के छह दिन बाद प्रभारी निदेशक डॉ. सविता मोहन शुक्रवार को अचानक उच्चशिक्षा निदेशालय पहुंचीं और निदेशक के कक्ष में बैठकर काम निपटाया। हालांकि वह उच्चशिक्षा निदेशक की कुर्सी पर तो नहीं बैठीं। उनका कहना था कि टीडीएस समेत कुछ जरूरी फाइलें थीं जिन्हें निपटाने के लिए यहां आना पड़ा।
सेवानिवृत्त प्रभारी उच्चशिक्षा निदेशक डॉ. सविता शुक्रवार दोपहर गौलापार स्थित निदेशालय पहुंचीं और निदेशक के कक्ष में बैठ गईं। इसके बाद निदेशक कक्ष से घंटी बजनी शुरू हुई तो दफ्तर में एक सप्ताह से हस्ताक्षरों के अभाव में लटकी फाइलें इधर से उधर दौड़ने लगीं। कुछ ने फाइलें कराईं तो कुछ लोग मैडम को पुनर्नियुक्ति की अग्रिम बधाई देने पहुंच गए। इसकी भनक निदेशालय से उड़ते हुए किसी तरह मीडिया को लग गई। जब अखबारनवीस निदेशालय में पहुंचे तो सेवानिवृत्त प्रभारी निदेशक डॉ. सविता ने कहा कि टीडीएस और आरटीआई की अपील की कुछ जरूरी फाइलें थीं, जिन्हें निपटाने के लिए आना पड़ा। पुनर्नियुक्ति होने के बारे में पूछने पर वह कहतीं हैं कि अगर सरकार उन्हें दोबारा काम करने का मौका देगी तो वह इसके लिए पूरी ऊर्जा के साथ तैयार हैं। सेवानिवृत्त प्रभारी निदेशक ने इस बात से साफ इनकार किया कि उन्होंने नीतिगत मामलों से संबधित फाइलों पर बैक डेट में हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि जो भी प्रकरण हैं उन्हें नये प्रभारी निदेशक निस्तारित करेंगे।