हल्द्वानी। जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापकों के 490 पद खाली हैं। हालात यह हैं कि कई स्कूलों में पढ़ाई एक शिक्षक के सहारे चल रही है। मानक के अनुसार प्राइमरी स्तर में एक स्कूल में दो शिक्षक या 60 बच्चों पर दो शिक्षक होने चाहिए। जूनियर में एक स्कूल में तीन शिक्षक या 100 बच्चों पर तीन शिक्षक होने चाहिए। यदि बच्चों की संख्या बढ़ती है तो इसके आधार पर शिक्षक पूरे होने चाहिए।
जिले में प्राथमिक स्तर के 940 और जूनियर के 218 स्कूल हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों के 1750 पद स्वीकृत हैं। इसमें 1260 पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं। सृजित पदों में 490 पद खाली हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि अध्यापकों की कमी से छोटे बच्चों की पढ़ाई को किस कदर प्रभावित हो रही होगी। स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या न होने से विद्यार्थियों की संख्या घट रही है। यह पलायन का भी एक बड़ा कारण बन रहा है। छात्र संख्या कम होने से कई स्कूल बंद होने के कगार पर हैं। गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है। इन स्कूलों पर उनके बच्चों का भविष्य निर्भर है। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक एचबी चंद ने बताया कि जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों को नियुक्त करने की प्रक्रिया में अनुमति के लिए निदेशक को पत्र भेजा गया है। निदेशक स्तर से अनुमति मिलने के बाद ही नियुक्त प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।