हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल से बड़ी संख्या में मरीज लापता हो गए। इन मरीजों का ब्योरा चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने तलब किया है। इसके बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) प्रबंधन लापता मरीजों का ब्यौरा जुटाने में लगा है। अभी उत्तराखंड फॉरेस्ट हॉस्पिटल ट्रस्ट को भंग और जीएमसी बनने (2010) से 2013 तक का 27 मरीजों का रिकॉर्ड भेजा गया है।
अस्पताल में मरीज ठीक होने के बाद डिस्चार्ज होते हैं या फिर चिकित्सीय मशविरा के बाद भी अपनी मर्जी और लिखित रजामंदी देने के बाद अस्पताल से जाते हैं। इनके बीच सुशीला तिवारी अस्पताल से कई मरीज दोनों प्रक्रिया के बगैर गायब हो गए। यह मरीज आये तो इलाज के लिए थे, लेकिन आधा, पूरा उपचार होने के बाद सूचना दिये बिना अचानक लापता (एब्सकोंड) हो गए। बताया जाता है कि इससे जुड़े मामले मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंचे हैं। इसके बाद देहरादून से लेकर हल्द्वानी तक सक्रियता बढ़ी है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने बिना सूचना दिये गायब होने वाले मरीजों का ब्यौरा मांगा है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ऐसे मरीजों का ब्योरा जुटाने में दिनभर लगा रहा। अभी 2010 से 2013 तक गायब होने वाले 27 मरीजोें की सूचना जुट सकी है, जिसे निदेशालय भेजा गया है। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा के अनुसार बिना सूचना दिये मरीजों के बारे में जानकारी मांगी गई थी, उसका ब्योरा भेजा गया है।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को भेजी गई सूचना
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन 2010 से 2013 तक का ही रिकॉर्ड जुटा सका
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से बिना सूचना दिये अस्पताल छोड़ने वाले मरीजों के बारे में जानकारी मांगी गई है। कोई मरीज बिना सूचना और इलाज कराये बगैर न जा सके, इसकी व्यवस्था को सुनिश्चित करने का निर्देश अस्पताल प्रबंधन को दिया गया है।
डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा