हल्द्वानी। किडनी मरीजों के बढ़ते बोझ के बीच बेस अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में हर दिन करीब 40 हजार लीटर पानी खर्च हो रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक मरीज की डायलिसिस के लिए 120 से 150 लीटर शुद्ध आरओ पानी चाहिए लेकिन इसे तैयार करने में कुल 400 से 500 लीटर पानी की खपत हो जाती है।
अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित डायलिसिस केंद्र में रोजाना 70 से 80 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। 28 बेड और 28 मशीनों वाले इस केंद्र में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और खराब जीवनशैली के कारण किडनी रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। कई मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है जबकि एक सत्र पूरा होने में करीब चार घंटे लगते हैं।
हर घंटे दो हजार लीटर आरओ पानी तैयार
डायलिसिस प्रक्रिया में मशीनों और विशेषज्ञ स्टाफ के साथ बड़ी मात्रा में शुद्ध पानी की जरूरत होती है। अस्पताल का आरओ प्लांट हर घंटे दो हजार लीटर शुद्ध पानी तैयार करता है जबकि लगभग उतनी ही मात्रा में पानी रिजेक्ट हो जाता है।
बरसात में बढ़ सकती है मुश्किल
डायलिसिस केंद्र के मैनेजर महेंद्र बिष्ट के अनुसार केंद्र में 240 मरीज पंजीकृत हैं और प्रतिदिन 40 हजार लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल पानी की कमी नहीं है लेकिन बरसात में सप्लाई बाधित होने पर स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे समय में रोजाना 10 से 12 पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं।