हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज के निलंबित प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद की बहाली को लेकर उनके समर्थन में एससी के कई संगठन आ गए हैं। संगठनों ने प्रदेश सरकार पर डॉ. प्रसाद का उत्पीड़न समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने भेदभावपूर्ण कार्यवाही का कड़ा विरोध किया।
शोषित मुक्ति संगठन के अध्यक्ष बालकृष्ण एडवोकेट की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को विभिन्न संगठनों की हुई में बैठक आयोजित की गई। इसमें वक्ताओं ने कहा कि पिछले वर्ष छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद की प्रत्याशी छात्रा मीमांशा आर्या के गलत प्रवेश के मुद्दे पर शासन की ओर से एमबीपीजी के तत्कालीन प्राचार्य और उच्चशिक्षा निदेशक डॉ. बीसी मेलकानी, प्राचार्य डॉ. जगदीश समेत चार लोगों को निलंबित किया गया था। संगठनों का आरोप है कि यह कार्रवाई मीमांशा आर्या का नामांकन पत्र खारिज न करने पर उच्चशिक्षा राज्यमंत्री के इशारे पर की गई थी। इसके लिए प्राचार्य पर दबाव बनाया जा रहा था। शासन ने निलंबन के आठ माह बाद निदेशक समेत तीन लोगों को तो बहाल कर दिया। लेकिन एक समान प्रकरण होने के बावजूद डॉ. जगदीश प्रसाद को बहाल करने में शासन अनावश्यक रूप से देरी कर रहा है, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। हाईकोर्ट डॉ. जगदीश प्रसाद के निलंबन आदेश को निरस्त कर चुका है। इसके बाद भी शासन भेदभाव नीति अपना रहा है। संगठनों का आरोप है कि दलित छात्रा मीमांशा आर्या की तरह ही प्रकरण वर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष गौरव कोरंगा का था लेकिन एबीवीपी का अध्यक्ष होने के कारण इस पर चुप्पी साधना कई प्रश्न खड़े करती है। बैठक में डॉ. अंबेडकर मिशन और फाउंडेशन, शोषित मुक्ति संगठन, रोष्ट्रीय बोध महासभा, डॉ. अंबेडकर समाज सेवा समिति एससीएसटी परिसंघ, शिल्पकार महासभा, एससीएसटी कर्मचारी फेडरेशन संगठनों के जेसी बेरी, जीआर टम्टा, राजेंद्र कुटियाल एडवोकेट, संजय बघरवाल एडवोकेट, सुंदर लाल, बीएल आर्य, हरीश चंद्र, भगवत प्रसाद एडवोकेट, अर्जुन लाल टम्टा, बलवंत सिंह भारतीय, श्याम सुंदर आदि मौजूद रहे।