हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से पहली बार कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए की गई होम स्टे व्यवस्था के बेहद सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। होम स्टे की व्यवस्था से गद्गद कुमाऊं मंडल विकास निगम ने इसे और व्यापक रूप देते हुए अन्य यात्रा पड़ाव में भी इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया है।
इस बार कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से नाभि गांव में होम स्टे की व्यवस्था की गई है। होम स्टे के तहत यात्री स्थानीय परंपराओं, खानपान, रीति रिवाज, तीज त्योहार, लोक पर्व, संस्कृति आदि से भी रूबरू हो रहे हैं। होम स्टे के अलावा गांव में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जहां यात्री पहाड़ की संस्कृति को समझ रहे हैं, वहीं यहां संस्कृति, परंपरा और वेशभूषा में रंग कर ग्रामीणों के साथ यात्री अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। इससे एक दूसरे की संस्कृति का आदान प्रदान हो रहा हैं। यह कार्यक्रम स्थानीय ग्रामीणों के रोजगार का बेहतर साधन बनकर सामने आ रहे हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि होम स्टे के दौरान जहां यात्रियों को स्थानीय व्यंजन परोसे जाते हैं, वहीं उनके मनोरंजन के लिए स्थानीय ग्रामीणों की ओर से पारंपरिक परिधानों के साथ स्वागत किया जा रहा है। बताया कि यात्रियों को स्थानीय पारंपरिक परिधान पहनाए गए और उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल किया गया। होम स्टे से इन तीन महीनों में जहां नाभि गांव 10 लाख रुपये कमाएगा, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी उन्हें आर्थिक लाभ हो रहा है। कहा कि होम स्टे के साथ ही लोगों को व्यवस्थित रोजगार से भी जोड़ना होगा। तभी पलायन को रोका जा सकता है।
होम स्टे के आ रहे सुखद परिणाम, पलायन रोकने को कारगर तरीका
अन्य यात्री पड़ावों में भी की जाएगी होम स्टे व्यवस्था
चौथे दल से कलाकारों को मिले 60 हजार रुपये
हल्द्वानी। कैलाश मानसरोवर यात्रियों के चौथे दल के जनसंपर्क अधिकारी अजय माकन और सुरेंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि नाभि गांव के ग्रामीणों ने कैलाश यात्रियों के स्वागत और होम स्टे पर गीत तैयार किया है। ग्रामीणों की ओर से आयोजित स्वागत से यात्री गद्गद हो गए।
केएमवीएन के प्रबंध निदेशक धीरज गर्ब्याल ने बताया कि नाभि गांव में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में चौथे दल के यात्रियों से ग्रामीण कलाकारों को 60 हजार रुपये की आमदनी हुई। इसी तरह अन्य दलों के यात्रियों से भी उन्हें आर्थिक लाभ हो रहा है। यह व्यवस्था ग्रामीणों के आर्थिक स्तर को उठाने और पलायन रोकने में कारगर साबित होगी।