हल्द्वानी। अब हज यात्रा पर जाने के लिए चार साल तक इंतजार नहीं करना होगा। सभी आवेदकों को समान रूप से कुर्रा अंदाजी में शामिल किया जाएगा, जिनका चयन होगा उन्हें हज यात्रा की अनुमति दे दी जाएगी। नई हज नीति में आरक्षण श्रेणी को खत्म करने का प्रस्ताव किया गया है। यदि इस पर सहमति बन गई तो 70 साल से अधिक उम्र वाले और लगातार चौथी बार आवेदन करने वाले आवेदक हज के लिए सीधे दावा नहीं कर सकेंगे।
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से पांच साल के लिए नई हज नीति तैयार करने के लिए पूर्व सचिव अफजल अमानुल्ला की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमटी गठित की गई थी। इसमें पूर्व न्यायाधीश एसएस पार्कर, केंद्रीय हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष कैसर शमीम, इस्लामिक जानकार कमाल फारूकी सदस्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में हज प्रभारी (संयुक्त सचिव) जे. आलम सदस्य सचिव थे। मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में कमेटी ने हज नीति में व्यापक बदलाव की सिफारिश की है। इसमें 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को बिना मेहरम के ही हज यात्रा पर जाने की अनुमति देने का प्रस्ताव भी शामिल है। हालांकि उलेमा और मुस्लिम संगठन इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। अभी तक महिलाएं मेहरम (परिवार के जिन व्यक्तियों से पर्दा न हो, मसलन शौहर, भाई, पिता और बेटा) के साथ ही हज पर जा सकती थी।
कमेटी की सिफारिशें
1 - आरक्षण श्रेणी ए और बी को खत्म कर दिया जाए। सभी आवेदकों को समान रूप से हज पर जाने के लिए ड्रा सिस्टम में शामिल किया जाए।
2 - 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को बिना मेहरम के हज पर जाने की इजाजत दी जाए। चार महिलाओं का समूह हज के लिए आवेदन कर सकेगा।
3 - कुल कोटे के 70 फीसदी हज यात्री हज समिति के जरिए जाएं, 30 फीसदी सीटें निजी टूर संचालकों को दी जाए।
4 - राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हज कोटे का प्रावधान संबंधित राज्य की मुस्लिम आबादी के अनुपात में किया जाए।
5 - हज के लिए प्रस्थान स्थलों की संख्या 21 से हटाकर नौ की जाए। इनमें दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बंगलुरु और कोच्चि शामिल हैं। यहां उपयुक्त हज भवनों का निर्माण किया जाए।
6 - हज यात्रा पानी के जहाज से भी शुरू की जाए, जिससे यात्रा संबंधी खर्च आधा हो जाएगा। (हज यात्रियों के मुंबई से समुद्री मार्ग के जरिये जेद्दा जाने का सिलसिला 1995 में रुक गया था।) नई तकनीक और सुविधाओं से युक्त पानी के जहाज एक समय में चार से पांच हजार लोगों को ले जाने में सक्षम हैं।
बैठक में दर्ज कराएंगे आपत्ति : राव शेर मोहम्मद
नई हज नीति के लागू होने से पहले ही विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। उत्तराखंड हज कमेटी के चेयरमैन हाजी राव शेर मोहम्मद ने बताया कि नई हज नीति वर्ष 2018-22 तक के लिए बनाई जानी है। कमेटी की रिपोर्ट में काफी बदलाव की सिफारिश की गई हैं।
आरक्षण श्रेणी जनहित में जरूरी है। इसे खत्म करना मुनासिब नहीं है। मेहरम के बिना महिलाओं का हज पर जाना शरई लिहाज से दुरुस्त नहीं हैं।
इस मामले में उलमा से मशवरा किया जाएगा। यदि पानी के जहाज से हज यात्रा शुरू की जाए तो हवाई जहाज का विकल्प भी बाकी रखना चाहिए। अक्तूबर के आखिरी दिनों में सभी राज्यों की हज कमेटियों की केंद्रीय हज कमेटी के साथ बैठक है। इसमें इन मुद्दों पर आपत्ति जताई जाएगी।