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यूजीसी के पांच करोड़ के अनुदान से सुधरेगी एमबी कालेज की तस्वीर

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हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कॉलेज को लंबे समय से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से कोई ग्रांट नहीं मिल पाई है। कॉलेज प्रशासन अब 13 वें प्लान के तहत यूजीसी से करीब पांच करोड़ रुपये की विशेष ग्रांट (अनुदान) हासिल करने के लिए जुट गया है। इसके लिए कई प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।
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डिग्री कॉलेजों में बेहतर पठन-पाठन की व्यवस्था के लिए यूजीसी की ओर से समय-समय पर विशेष ग्रांट (अनुदान) दिया जाता है लेकिन यूजीसी से एमबीपीजी कॉलेज को लंबे समय से कोई ग्रांट नहीं दी गई। प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद ने बताया कि 11 वें प्लान के अंतर्गत महाविद्यालय को 25 लाख 30 हजार की विशेष ग्रांट मंजूर हुई थी। इसमें पहली किश्त के रूप में महाविद्यालय को 14 लाख 37000 रुपये की राशि मिली थी मगर इस राशि का उपभोग प्रमाणपत्र यूजीसी नहीं जा सका जिसके कारण अगली किश्त जारी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 12 वें प्लान के अंतर्गत पहली अप्रैल 2012 से लेकर 31 मार्च 2017 के दौरान एक भी प्रस्ताव पर कोई राशि नहीं दी गई। इस संबंध में यूजीसी से वार्ता की जा रही है। प्राचार्य ने बताया कि यूजीसी के रिकार्ड में महाविद्यालय के नाम में ही त्रुटि थी। अभिलेखों में मोतीराम बाबू राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्द्वानी नाम दर्ज था जिसे अब दुरुस्त कर मोतीराम बाबूराम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्द्वानी कराया गया है।

कोट
कैपीसिटी बिल्डिंग के तहत छात्र संख्या के आधार पर आधुनिक उपकरण, क्लासरूम, लैब के अलावा रेमीडियल क्लासेज, नेट्र, यूसेट एवं सिविल सर्विसेज की कोचिंग आदि के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पीजी डेवलेपमेंट के तहत भी यूजीसी से अनुदान के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है।
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-डॉ. जगदीश प्रसाद, प्राचार्य
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